“संस्कृति और आत्मीयता से बनता है राष्ट्र। कुटुंब प्रबोधन और नागरिक कर्तव्यों पर फोकस
डीएनबी भारत डेस्क
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के तहत बिहार के श्रीनगर में एक प्रमुख जनसंगोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें समाज की 35 श्रेणियों से जुड़े 300 से अधिक लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “पंच परिवर्तन” रहा, जिसके माध्यम से व्यक्तिगत से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक बदलाव की अवधारणा पर चर्चा हुई।

आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार टोली सदस्य मुकुल कानेटकर ने शिरकत की। मुख्य वक्ता मुकुल कानेटकर ने कहा कि राष्ट्र की एकता का आधार संस्कृति और आत्मीयता है, न कि भाषा या राजनीति। उन्होंने कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, आरक्षण और नागरिक कर्तव्यों पर जोर देते हुए कहा कि बदलाव की शुरुआत व्यक्ति से होकर समाज और राष्ट्र तक पहुंचती है।
अपने प्रभावी उद्बोधन से संगोष्ठी का मार्गदर्शन करते हुए उन्होंने कहा कि भारत और राष्ट्रीयता हमारे लिए ना तो कोई आर्थिक विषय है और ना ही राजनीतिक यह किसी एक भाषा से निर्मित राष्ट्र भी नहीं है इस राष्ट्र का वास्तविक आधार हमारी संस्कृति हमारे संस्कार और हमारे भीतर की आत्मीयता है।
इस अवसर पर क्षेत्र कार्यवाह डॉ. मोहन सिंह, सह क्षेत्र कार्यवाह विनेश प्रसाद, क्षेत्र बौद्धिक प्रमुख राणा प्रताप सिंह, क्षेत्र प्रचार प्रमुख राजेश पांडे, प्रांत प्रचारक उमेश जी, विभाग कार्यवाह गिरिधर गोपाल मुरारी सिन्हा, प्रांत सह व्यवस्था प्रमुख सुनील कुमार गरीमामयी उपस्थिति रही।
डीएनबी भारत डेस्क