डीएनबी भारत डेस्क
राष्ट्रकवि दिनकर की 52वीं पुण्यतिथि के मौके पर शुक्रवार को दिनकर चबूतरा का शुभारंभ जनपद के वरिष्ठ साहित्यकारों ने किया। कला संस्कृति की जनपक्षीय संस्था प्रतिबिम्ब के बैनर तले दिनकर चबूतरा भोला स्थान सिमरिया में आयोजित कवि सम्मेलन की शुरूआत में लोकगायक डॉ सच्चिदानंद पाठक ने सृजनशील संकल्प शक्ति की प्रतिपल अमिट कहानी लिख, लिखने वाले लिखना है तो सत्य न्याय की वाणी लिख कविता का पाठ कर खूब वाहवाही लूटी।

अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि अशांत भोला ने सच है कि हम कम लिखे हैं, जख्म पर मरहम लिखे हैं, बेचकर अपनी खुशी हम, आपका सब गम लिखे हैं जैसे कई धारदार मुक्तक को सुनाया। कवि प्रफुल्ल मिश्र ने शून्य से चला हूं, सफर अभी तो जारी है, मेरा हौसला मेरी मुश्किलों पर भारी है। उमेश कुंवर कवि ने भारत के सामंती चेतना, गरीबी व कर्ज में दबे लोगों की पीड़ा को अपनी कविता में बखूबी उकेड़ा।
डॉ शैलन्द्र शर्मा त्यागी ने भेड़ियों के गांव में मेमनों का क्या हाल है, शहर आबाद हो रहा गांव क्यों बर्बाद है कविता को सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी। युवा कवि रामकृष्ण ने दिनकर की व्यक्तित्व व कृतित्व पर आधारित कविता का पाठ किया। ई कन्हाई पंडित ने प्रदूषण पर धारदार कविता सुनाई। कवि सम्मेलन में उपेन्द्र राम, बबलू दिव्यांशु, संजीव फिरोज, केदार नाथ भास्कर, एके मनीष, रामानंद यादव, अमन गौतम, अजीत झा सुजीत आदि ने अपनी कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन पत्रकार प्रवीण प्रियदर्शी एवं अतिथियों का स्वागत विनोद बिहारी ने किया। मनीष कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
कवि सम्मेलन से पूर्व बीएचयू के प्रोफेसर रामाज्ञा शशिधर ने ऑनलाइन श्रद्धांजलि देते हुए दिनकर चबूतरा के शुभारंभ होने पर कहा कि इस स्थान की ऐतिहासिक महत्ता है। दिनकर अपने अध्ययन काल में इसी रास्ते से होकर मोकामा पढ़ने जाते थे। इसी रास्ते आजादी के दीवानों का आना-जाना होता था। आने वाले समय में यह दिनकर चबूतरा एक नई रोशनी देने का काम करेगा। दिनकर पुस्तकालय के अध्यक्ष विश्वंभर सिंह, कृष्ण कुमार ठाकुर आदि ने विचार ने व्यक्त किया और दिनकर चबूतरा के लेखकों को शुभकामनाएं दी। मौके पर कृष्णनंदन यादव, कृष्ण मुरारी, टिंकू मल्लिक, दयानंद कुमार, पुण्यानंद मिश्रा, आदित्य कुमार, उमेश राय एवं गीता राय आदि मौजूद थे।
बेगूसराय बीहट संवाददाता धरमवीर कुमार की रिपोर्ट