कविवर शक्र की 39वीं पुण्यतिथि पर सिमरिया में विचार गोष्ठी, नई पीढ़ी को शक्र के सत्ता विरोधी साहस से प्रेरणा लेने की जरूरत

DNB Bharat Desk

कविवर शक्र साहित्य उत्थान समिति के तत्वावधान में बुधवार को सिमरिया दो पंचायत के रूपनगर ठाकुरबाड़ी में कविवर शक्र की 39 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। वर्तमान समय में शक्र साहित्य की प्रासंगिकता विषयक विचारगोष्ठी की अध्यक्षता दिनकर पुस्तकालय के अध्यक्ष विश्वंभर सिंह एवं संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण प्रियदर्शी ने किया।

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एम के एस महाविद्यालय फतुहा के अंग्रेजी के प्रोफेसर डा घनश्याम कुमार ने कहा कि शक्र की कविताएं अगर पांडुलिपियों से बाहर आ जाए तो वे सबाल्र्टन के प्रतिनिधि कवि साबित होंगे। नई पीढ़ी को शक्र के सत्ता विरोधी साहस से प्रेरणा लेनी चाहिए। विशिष्ट अतिथि बीएचयू के प्रोफेसर रामाज्ञा शशिधर ने कहा कि हमें अपने जनपद के कवि शक्र पर गौरव है। उनकी रचनाएं हमेशा आमजनों को प्रेरित करती रहेगी। अपने समय के महत्वपूर्ण कवियों में कविवर शक्र थे। उस जमाने की देशभर की साहित्यिक पत्रिकाओं में उनकी रचनाएं प्रकाशित होती थी। वे अपने समय व समाज को बहुत ही शिद्दत से महसूस करते थे और अपनी रचनाओं में जगह देते थे।

कविवर शक्र की 39वीं पुण्यतिथि पर सिमरिया में विचार गोष्ठी, नई पीढ़ी को शक्र के सत्ता विरोधी साहस से प्रेरणा लेने की जरूरत 2आज जरूरत इस बात की है कि नई पीढ़ी तक उनकी रचनाओं को पहुंचाने का काम किया जाय। वहीं जसम के राज्य सचिव दीपक सिन्हा ने कहा कि शक्र की कविता वाचिकता की कविता है। वे लिखने से ज्यादा बोलने वाले कवि हैं। वहीं जलेस के राज्य सचिव विनीताभ ने कहा कि शक्र आजीवन गरीबों, शोषितों व मजदूरों के लिए कलम चलाते रहे। उन्होंने कहा कि कविवर शक्र आजादी की लड़ाई में भी सक्रिय भूमिका निभाई वहीं आजाद भारत में विषमता के खिलाफ कविताओं के माध्यम से आमजन को प्रेरित करते रहे। एसबीएसएस काॅलेज बेगूसराय के प्राध्यापक डा नीलेश कुमार ने कहा कि शक्र ने अपनी कविता में बड़ा हिस्सा स्त्रियों के लिए दिया। उन्होंने किसानिन, मजदूरिन व भिखारिन जैसी अमर कविताएं लिखी। वरिष्ठ कवि अशांत भोला ने कहा कि शक्र जी हमेशा मंच से अलग रहे। वे संकोची स्वभाव के थे। उतने बड़े कवि होने का एहसास मुझे बाद में हुआ। ऐसे महान साहित्यकार के साहित्य को आमजन तक पहुंचाना हमसबों का दायित्व है।

कविवर शक्र की 39वीं पुण्यतिथि पर सिमरिया में विचार गोष्ठी, नई पीढ़ी को शक्र के सत्ता विरोधी साहस से प्रेरणा लेने की जरूरत 3स्वागत भाषण समिति के अध्यक्ष रामानुज राय ने किया तथा शक्र की जीवनी को संस्था के सचिव राहत रंजन ने रखा। इस मौके पर अवधेश कुमार पप्पू, पूर्व पंसस भिखारी यादव, उप मुखिया सुदिन पासवान, चितरंजन कुमार, मुलानंद कुमार, अमरजीत कुमार पप्पू, अविनेश कुमार, बिकेश कुमार, राहुल कुमार, शिवदानी सिंह, कृष्ण कुमार रईस, प्रियंक कुमार, विद्यासागर ठाकुर, कृष्ण नंदन यादव, लक्ष्मी नारायण देव, सुमित कुमार, महंत चंद्रमा दास, अनिल यादव, सिकंदर यादव,   जय प्रकाश यादव, प्रमोद यादव, दिलीप कुमार समेत कई अन्य लोग मौजूद थे। इसके पूर्व सभी अतिथियों ने कविवर शक्र की प्रतिमा व उनके तैल चित्र के समीप माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

कविवर शक्र साहित्य उत्थान समिति सिमरिया दो के द्वारा आयोजित कार्यक्रम की जानकारी देते हुए शिक्षक चितरंजन कुमार व अविनेश कुमार ने बताया कि साहित्यिक संगोष्ठी के अंत में सिमरिया दो पंचायत में मैट्रिक में प्रथम श्रेणी से उतीर्ण होने वाले 55 छात्र-छात्राओं तथा बिहार पुलिस व होमगार्ड में सफल होने वाले आधा दर्जन अभ्यर्थियों को सम्मानित किया गया।

कविवर शक्र की 39वीं पुण्यतिथि पर सिमरिया में विचार गोष्ठी, नई पीढ़ी को शक्र के सत्ता विरोधी साहस से प्रेरणा लेने की जरूरत 4बिहार पुलिस में सफल होने वाले अभ्यर्थियों में से बरियाही निवासी सीताराम यादव के पुत्र बादल कुमार, इसी गांव के विलाश यादव के पुत्र हरिओम कुमार, कसहा गांव निवासी उमेश यादव की पुत्री सोनिका कुमारी व रुपनगर निवासी ललन दास की पुत्री अंजली कुमारी व होमगार्ड में बरियाही के महेश यादव के पुत्र राम करतार कुमार व कसहा के सुरेंद्र यादव के पुत्र दिलखुश कुमार शामिल है। वही मेधावी छात्र-छात्राओं में आशिर्वाद कुमार, भानु प्रिया, स्मिता, राज लक्ष्मी, सन्नी, साक्षी, पीयूष, अर्जुन, अमितेश, मौसम, लक्ष्मी आदि शामिल थे।

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