डीएनबी भारत डेस्क
जी हां आपने सही सुना है कि चार साल बाद 4 हजार 2 सौ बच्चों को मिलेगें पोषक।यह मामला वीरपुर प्रखंड क्षेत्र के नौला, डीह, भवानंदपुर, वीरपुर पूर्वी, वीरपुर पश्चिम, गेंन्हरपुर, जगदर और पर्रा पंचायत में अवस्थित आंगनबाड़ी केंद्रों से संबंधित है। वीरपुर प्रखंड क्षेत्र के उक्त पंचायतों में समाज कल्याण विभाग के द्वारा 105 आंगनबाड़ी केंद्र फिलहाल कार्य रत है।

जहां बच्चों को खेल खेल में पढ़ने से संबंधित बातों को सिखाने,मिनू के अनुसार तैयार पुरक भोजन देने,कुछ लिखने पढ़ने के लिए सलेट देने, कोई भी बच्चा नंग धड़ंग आंगनबाड़ी केंद्र पर नहीं आवे इसके लिए साल में एक बार पहले 4 सौ नगद राशि देने का प्रावधान तो सरकार और विभाग के द्वारा बनाए गए थे। इसके सफल संचालन के लिए और समय समय पर विभाग से डिमांड करते रहने के लिए प्रखंड स्तर पर सीडीपीओ कार्यालय भी खोले गए हैं।
और उसमें पदाधिकारी वगैरह भी नियमानुसार रहा तो करते हैं। फिर भी इन चार साल के पोसाक राशि या तैयार पोसाक कहा गए। इस में किया सेवीका दोषी है,या सीडीपीओ या फिर विभाग खैर यह तो जांच का विषय है कि दोशी कौन है।जो भी हो वीरपुर सीडीपीओ नितेश कुमार के अथक प्रयास से अब चार साल बाद ही सही जीविका समुह के द्वारा तैयार पोसाक 105 आंगनबाड़ी केंद्रों पर चार हजार दो सौ बच्चों को मिलना तय तो हो गया है। अब देखना यह है कि इनभेल्प में बंद पोसाक गुणवत्तापूर्ण हैं कि नहीं। इसका खुलासा तो वितरण के बाद लाभूक ही कर सकेगें।
बेगूसराय वीरपुर संवाददाता गोपल्लव झा की रिपोर्ट