डीएनबी भारत डेस्क
बेगूसराय जिले के बछवाड़ा का पवित्र झमटिया धाम गंगा घाट पर गुरुवार की सुबह आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे श्रद्धालुओं की चीखें उस वक्त निकल गईं, जब गंगा की लहरों पर एक 28 वर्षीय नौजवान का बेजान शरीर उतराता दिखा। जिस घर का चूल्हा उसकी दिनभर की हाड़-तोड़ मजदूरी से जलता था, उस घर का इकलौता सहारा अब हमेशा के लिए खामोश हो चुका था।

मृतक की पहचान दादूपुर पंचायत के नारेपुर श्रवण टोल दियारा निवासी जयराम साह के 28 वर्षीय पुत्र मनीष कुमार के रूप में हुई। बुधवार दोपहर घर से निकले मनीष जब रात तक नहीं लौटे, तो परिजन अनहोनी की आशंका से रातभर दर-दर भटकते रहे। सुबह जब गंगा की कोख से उसका शव बाहर निकाला गया, तो परिजनों की उम्मीदें एक पल में आंसुओं के सैलाब में तब्दील हो गईं। घाट पर मौजूद हर आंख उस वक्त नम हो गई जब नाविक भिखारी सिंह ने पानी से उसका शव बाहर खींचा।
चार भाइयों में सबसे बड़े मनीष पर ही पूरे परिवार की गृहस्थी टिकी थी। महज छह साल पहले उसने नए जीवन की शुरुआत की थी। घर पर उसका चार साल का बेटा और दो साल की नन्हीं बेटी आज भी दरवाजे पर अपनी नन्हीं आंखों से पिता के लौटने की राह देख रहे हैं, बेखबर कि उनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए छिन चुका है। पत्नी के करुण क्रंदन और परिजनों की चीत्कार से पूरा गांव गमगीन हो उठा।
स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि मुन्ना यादव ने इस हृदयविदारक घटना पर गहरा शोक जताते हुए कहा कि मनीष बेहद गरीब और कर्मठ मजदूर था, उसके जाने से परिवार दाने-दाने को मोहताज हो जाएगा। उन्होंने सरकार से पीड़ित परिवार को अविलंब आर्थिक सहायता और मुआवजा देने की गुहार लगाई है।
घटनास्थल पर पहुंचे बछवाड़ा थानाध्यक्ष विकास कुमार राय ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल बेगूसराय भेज दिया है और पुलिस मामले की तफ्तीश में जुट गई है।
बेगूसराय बछवाड़ा संवाददाता मनोज कुमार राहुल की रिपोर्ट