डीएनबी भारत डेस्क
समस्तीपुर: बुलंद हौसले, कड़ी मेहनत और अटूट संकल्प के दम पर बिहार के समस्तीपुर जिले के आधारपुर के रहने वाले जाने माने मशहूर शिक्षक फिरोज अहमद के पुत्र जफर अहमद ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जो हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। वर्किंग प्रोफेशनल के तौर पर नौकरी करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की Intellectual Research and Law प्रवेश परीक्षा में शानदार रैंक हासिल की है। इस सफलता के साथ अब उन्हें देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में Intellectual Property Rights (IPR) से जुड़े शोध कार्य का अवसर मिला है। इसके साथ ही वे कानून (Law) की पढ़ाई भी करेंगे।

जफर की शैक्षणिक पृष्ठभूमि इंजीनियरिंग की रही है। उन्होंने बी.टेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की, लेकिन उन्होंने अपने सपनों को कभी पीछे नहीं छोड़ा। लगभग छह वर्षों तक नौकरी और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने कठिन परिश्रम, अनुशासन और बेहतरीन टाइम मैनेजमेंट के बल पर यह मुकाम हासिल किया।
IIT में वे इंजीनियरिंग और Intellectual Property Rights (IPR) के क्षेत्र में उन्नत शोध करेंगे। साथ ही कानून की पढ़ाई भी करेंगे। आज के दौर में विज्ञान, तकनीक, ऊर्जा, पर्यावरण और बौद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़े मामलों में विशेषज्ञों की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए इंजीनियरिंग, रिसर्च और लॉ का यह अनूठा संयोजन उन्हें भविष्य में एक विशिष्ट विशेषज्ञ के रूप में स्थापित करेगा। जफर की यह उपलब्धि केवल एक प्रवेश परीक्षा में सफलता तक सीमित नहीं है। शिक्षा और अध्यापन के क्षेत्र में उनका रिकॉर्ड पहले से ही उत्कृष्ट रहा है।
उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए International Dazzling Educator Award से सम्मानित किया जा चुका है। यह सम्मान उन्हें बॉलीवुड अभिनेत्री मौनी रॉय के हाथों प्रदान किया गया था। इसके अलावा उन्हें Indian Education Award से भी नवाज़ा जा चुका है। उन्होंने National Teachers Olympiad में भी पूरे देश में ऑल इंडिया रैंक 11 (AIR-11) हासिल कर अपनी विषय विशेषज्ञता और शैक्षणिक क्षमता का परिचय दिया था। लगातार मिल रही इन उपलब्धियों ने उन्हें शिक्षा और शोध के क्षेत्र में एक अलग पहचान दिलाई है।
जफर की सफलता यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो नौकरी की व्यस्तता भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती। उनकी यह उपलब्धि बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों और व्यस्त जीवन के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं।
समस्तीपुर संवाददाता अफरोज आलम की रिपोर्ट