जनविश्वास बिल के तहत 78 तरह के कानूनों में बदलाव के प्रावधान ,गुलामी की जंजीरों को तोड़ने वाला है यह बिल
डीएनबी भारत डेस्क
लोकसभा में पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जनविश्वास बिल पेश किया। इस बिल के तहत 78 कानूनों में बदलाव का प्रावधान है। इसका उद्देश्य आम जनजीवन और व्यापार को आसान बनाना है. मामूली सी चूक भी जहां अक्सर आपराधिक मुकदमे का रूप लेती थी इसको देखते हुए जनविश्वास बिल एक बड़े बदलाव की तरह सामने आएगा। खगडिया के सांसद राजेश वर्मा ने इस बिल का समर्थन करते हुए लोकसभा के पटल पर 8 मिनट तक अपनी बातों को जोरदार तरीके से रखा।

उन्होंने कहा की गुलामी की जंजीरों को तोड़ने वाला और 140 करोड़ भारत के नागरिकों के अंदर विश्वास भरने वाला यह बिल है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल एवं कमेटी के अध्यक्ष तेजस्वी सूर्य का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि श्री तेजस्वी सूर्या की अध्यक्षता वाली कमेटी में 49 सिटिंग में कानूनों को एनालाइज किया गया है जिसकी कल्पना विपक्ष कभी नहीं कर सकता है। अंग्रेजों के जमाने के कोर्ट फीस एक्ट 1870 से लेकर नए कोस्टल शिपिंग एक्ट 2025 से हर कानून को न केवल बारीकी से अध्ययन किया गया है बल्कि सर्वसम्मति से पारित करने का काम हमारे इस समिति ने किया है।
यह बिल सही मायने में सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे संतु निरामया श्लोक को चरितार्थ करता है। इस बिल में सबको साथ लेकर चलने की सोच है। इस बिल के माध्यम से जो बदलाव होने जा रहा है वह ऐतिहासिक बदलाव है। जिन 78 कानून में संशोधन करने का काम किया जा रहा है न केवल इसे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बल्कि इसके साथ-साथ आम नागरिकों का इज ऑफ लिविंग भी सुधरेगा। यह बिल हमारे देश के किसान, युवा ,व्यापारियों के लिए संजीवनी की तरह काम करेगी। आगे बात करते हुए उन्होंने सदन के पटल पर कह की किसानों के लिए द कैटल ट्रेसपास एक्ट 1871 के तहत जब किसी किसान का कोई मवेशी दूसरे किसान के खेतों में चला जाता था, उसके फसल को बर्बाद करता था तो उसको जेल तक का प्रावधान पुरानी सरकार ने करने का काम किया था।
हमारी सरकार ने डिक्रिमिनिलाइज्ड ( व्यक्ति के अपराधिक वर्गीकरण को हटाने / काम करने) का काम किया है और अब केवल इसको जुर्माने तक सीमित करने का काम किया गया है। द एपीडा एक्ट 1985 के तहत जब किसान निर्यात के रिटर्न को सही समय पर नहीं जमा कर पाता था तो विपक्ष ने उन पर मुकदमा चलाने तक का भी काम किया था और हमारी सरकार ने पहली बार गलती पर इसको चेतावनी तक सीमित करने का काम किया है। द अप्रेंटिस एक्ट 1961 के तहत नियुक्तियों को अप्रेंटिसशिप कोटा पूर्ण करने पर अपराधिक आरोपी के तरह उन पर कानूनी कार्रवाई होती थी। हमारी सरकार ने इसको खत्म करने का काम किया है। अब जितनी भी कंपनियां है वह न केवल खुलकर युवाओं को ज्यादा से ज्यादा रोजगार देगी बल्कि उनको प्रशिक्षित करने का काम करेगी। श्री राजेश वर्मा ने बुनकर एक्ट पर बात करते हुए कहा कि मैं भागलपुर में जन्म लिया हूं जहां एक बड़ी आबादी बुनकरों की है।
बुनकरों के लिए द हैंडलूम एक्ट 1985 लाया गया था हमारे गरीब बुनकर जो गलती से आरक्षित वस्तु अगर बना लेते थे तो उनको जेल में डालने का भी प्रावधान इन लोगों ने बनाया था। हमारी सरकार ने उन प्रावधानों को खत्म करते हुए केवल पेनल्टी तक इसको सीमित करने का काम किया है। सड़कों पर जब लोग चलते हैं तो द मोटर व्हीकल एक्ट 1985 के तहत प्रतिदिन जो ट्रैफिक संबंधित छोटी-छोटी गलतियां होती है उसमें आम नागरिक मुकदमों से लेकर कोर्ट और आरटीओ के चक्कर लगाते थे। हमारी सरकार ने पहली गलती पर चेतावनी और फिर जुर्माने तक इसको सीमित करने का काम किया है। मेरी
लोकसभा खगड़िया में सबसे ज्यादा मक्का उत्पादन होता है। मक्का और मखाना हब एपीडा एक्ट लाया गया था वहां पर जब पहली बार कोई किसान निर्यात करने पर कागजी कार्रवाई में कोई गलती कर देता था तो उस पर मुकदमा चलाने का काम यह लोग करते थे। हमारी सरकार ने उसको हटाकर पूरी तरीके से किसानों के मनोबल को बढ़ाने का काम किया है । अब पूरी तरीके से कृषि के क्षेत्र में न केवल किसान बल्कि युवा भी अपने स्टार्टअप को लेकर दुनिया भर में निडर होकर निर्यात कर सकेंगे।
खगड़िया संवाददाता राजीव कुमार की रिपोर्ट