इलाज के नाम पर उगाही या गुंडागर्दी, निजी अस्पताल में डिस्चार्ज मांगने पर परिजनों को पीटा
डीएनबी भारत डेस्क
समस्तीपुर मोहनपुर स्थित कमला इमरजेंसी एंड मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल एक बार फिर विवादों में घिर गया है। आईसीयू में भर्ती एक मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन, कर्मचारियों, डॉक्टरों तथा डॉक्टरों द्वारा बुलाए गए कथित गुंडों पर मारपीट और मनमानी वसूली का गंभीर आरोप लगाया है।

परिजनों का कहना है कि मरीज को आईसीयू में भर्ती करने के बाद न तो उन्हें इलाज की सही जानकारी दी गई और न ही दी जा रही दवाओं के बारे में बताया गया। आरोप है कि मरीज की हालत से अधिक बिल लगातार बढ़ता गया और बिना किसी स्पष्ट विवरण के मनमाने ढंग से बिल थमाया जाता रहा। परिजनों ने बताया कि मरीज से मिलने तक की अनुमति नहीं दी जा रही थी और बार-बार केवल बिल भुगतान करने का दबाव बनाया जाता रहा।
जब मरीज की स्थिति को देखते हुए उसे दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए छुट्टी (डिस्चार्ज) की मांग की गई, तो अस्पताल प्रबंधन ने छुट्टी से पहले पूरा बिल जमा करने की शर्त रख दी। परिजनों का आरोप है कि यह बिल पूरी तरह मनमाना और अनुचित था। परिजनों का यह भी आरोप है कि बिल को लेकर जब उन्होंने सवाल उठाए तो अस्पताल के कर्मचारियों और डॉक्टरों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। इतना ही नहीं, डॉक्टरों द्वारा बाहर से बुलाए गए कुछ असामाजिक तत्वों ने परिजनों के साथ मारपीट की, जिससे अस्पताल परिसर में अफरातफरी का माहौल बन गया।
घटना के बाद पीड़ित परिजनों में भारी आक्रोश है और उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। परिजनों का कहना है कि निजी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिवारों का इस तरह शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल इस मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर निजी अस्पतालों की मनमानी पर कब तक लगाम लगेगी।
समस्तीपुर संवाददाता अफरोज आलम की रिपोर्ट
