डीएनबी भारत डेस्क
भगवानपुर मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए आकांक्षी प्रखंड भगवानपुर में एक नवाचार के द्वारा

स्वास्थ्य विभाग और पिरामल फाउंडेशन ने एक अनूठी पहल शुरू की है। अब गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व जांच (ANC) के लिए केवल मौखिक संदेश नहीं दिया जाएगा, बल्कि उन्हें सम्मानपूर्वक ‘आमंत्रण पत्र’ देकर स्वास्थ्य केंद्र बुलाया जाएगा।
तीन तारीखों पर होगी विशेष जांच
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत अब महीने में केवल एक दिन नहीं, बल्कि तीन विशेष तिथियों पर गर्भवती महिलाओं की जांच की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने हर महीने की 9, 15 और 21 तारीख को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सकीय जांच और परामर्श के लिए विशेष व्यवस्था की है।
हाई-रिस्क प्रेगनेंसी (HRP) की पहचान है मुख्य लक्ष्य
इस नवाचार का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान होने वाले जोखिमों को समय रहते पहचानना है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), भगवानपुर के माध्यम से बांटे जा रहे इन आमंत्रण पत्रों के पीछे की रणनीति यह है कि:
* नियमित जांच: गर्भवती महिलाएं समय-समय पर अस्पताल आएं ताकि उनके स्वास्थ्य की निगरानी हो सके।
* जोखिम की पहचान: उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं (High-Risk Pregnancy) को चिन्हित कर उनका विशेष इलाज शुरू किया जा सके।
* सुरक्षित प्रसव: जटिल मामलों को पहले ही पहचान कर सही समय पर उच्च स्वास्थ्य केंद्रों पर रेफर किया जा सके।
जिम्मेदारों के बयान: सफलता के लिए एकजुट प्रयास
प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक आशुतोष गांधी (BHM):”हमारा लक्ष्य अस्पताल में आने वाली हर गर्भवती महिला को गुणवत्तापूर्ण सेवा देना है। आमंत्रण पत्र की इस व्यवस्था से हम यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि कोई भी महिला जांच से वंचित न रहे और अस्पताल की भीड़ को भी बेहतर ढंग से प्रबंधित किया जा सके।”
प्रखंड सामुदायिक समन्वयक (BCM): सिंधु कुमारी “आशा कार्यकर्ताओं को इस कार्य के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है। आमंत्रण पत्र देने से महिलाओं के मन में स्वास्थ्य केंद्र के प्रति अपनापन बढ़ता है। हम जमीनी स्तर पर शत-प्रतिशत कवरेज का प्रयास कर रहे हैं।”
पिरामल फाउंडेशन प्रतिनिधि दीपक मिश्रा : “व्यवहार परिवर्तन (Behavioral Change) के लिए यह पहल एक मील का पत्थर साबित होगी। जब किसी को लिखित निमंत्रण मिलता है, तो वह जिम्मेदारी और सम्मान का अनुभव करता है। हम स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर शून्य प्रसव मृत्यु’ के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं।
आशा दीदी की अहम भूमिका
इस मुहिम में ‘आशा दीदी’ की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। वे घर-घर जाकर महिलाओं को उनकी गर्भावस्था के महीने के अनुसार यह आमंत्रण पत्र सौंप रही हैं। पत्र के माध्यम से उन्हें पोषण, सावधानी और नियमित जांच के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, डाक्टर दिलीप कुमार भगवानपुर ने संदेश देते हुए कहा, “आपकी थोड़ी सी सावधानी और नियमित जांच आपको और आपके आने वाले बच्चे को कई परेशानियों से बचा सकती है। हम चाहते हैं कि हर प्रसव सुरक्षित हो।”
इस पहल से न केवल महिलाओं में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति उनका भरोसा भी और मजबूत होगा।
बेगूसराय भगवानपुर संवाददाता गणेश प्रसाद की रिपोर्ट