डीएनबी भारत डेस्क
आसमान में चक्रवाती तूफान का खतरा, मौसम का बदला मिजाज और प्रकृति की चुनौती लेकिन पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना लेकर सुहागिन महिलाओं की आस्था नहीं डिगी। अर्नव चक्रवाती तूफान के बीच महिलाओं ने पूरे श्रद्धा और विश्वास के साथ करवाचौथ का व्रत रखा।

सुबह से ही महिलाओं ने निर्जला उपवास कर भगवान से अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। दिनभर भूखी-प्यासी रहकर सुहागिनों ने परंपराओं का निर्वहन किया और शाम होते ही चांद के दीदार का इंतजार शुरू हो गया। करवाचौथ का पर्व सुहाग, प्रेम और अटूट विश्वास का प्रतीक है। मौसम की अनिश्चितता के बावजूद महिलाओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी।
सोलह शृंगार से सजी महिलाओं ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की और करवाचौथ की कथा सुनकर अपने व्रत को पूरा करने की तैयारी की। हर महिला की निगाह आसमान पर टिकी रही, ताकि चांद के दर्शन कर पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत का पारण किया जा सके। हालांकि, चक्रवाती मौसम के कारण चांद के दीदार को लेकर असमंजस बना रहा।
बावजूद इसके, महिलाओं की आस्था और समर्पण ने इस पर्व को खास बना दिया। सुहाग की सलामती की दुआ और जीवनसाथी के प्रति प्रेम का यह त्योहार एक बार फिर रिश्तों की मजबूती का संदेश दिया।
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