सांस्कृतिक विरासत, बिहार के भिरहा में उमड़ता है ‘मिनी वृंदावन’ का रंग, पूर्वजों ने मुगलकाल से संजो रखी है यह अनूठी परंपरा
डीएनबी भारत डेस्क

समस्तीपुर:रोसड़ा अनुमंडल के भिरहा गांव की होली वृंदावन की होली का नजारा प्रस्तुत करता है। इसे देखने के लिए बिहार के दूर दराज क्षेत्रों के अलावे झारखंड समेत कई अन्य राज्यों के लोगों का आना जाना लगा रहता है। भिरहा की होली न सिर्फ मिथिलांचल में बल्कि प्रदेश स्तर पर इसकी एक अलग पहचान है।
दो दिवसीय महोत्सव की तैयारी होली से कई दिनों से की जाती है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि तकरीबन ढ़ाई सौ वर्षों से आज भी ब्रज के तर्ज पर यहां होली मनाये जाने की अनोखी परंपरा कायम है। तभी तो यहां की होली को देख राष्ट्र कवि दिनकर ने इसे बिहार के वृंदावन की संज्ञा दी थी। यहां की होली आपसी सौहार्द एवं भाईचारे का संदेश देता है। दो सप्ताह पूर्व से हीं गांव में उत्सव का माहौल रहता है।
सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ- साथ पूरे गांव इलेक्ट्रोनिक सजावट और तोड़न द्वारा तो देखते हीं बनता है। होली के पूर्व होलिका दहन की संध्या से हीं पूरब, पश्चिम एवं उत्तर टोले में निर्धारित स्थानों पर अलग-अलग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होता है। इस अवसर पर ख्याति प्राप्त बैंड पार्टियों में प्रतियोगिता का दौर चलता है। प्रतियोगिता में अव्वल आने वाले बैंड पार्टी को पुरस्कार से नवाजा जाता है। इस दौरान हजारों लोग मौजूद रहते हैं।
होली के दिन नत्य का आनंद लेने के पश्चात तीनों टोले के लोग गांव के फगुआ पोखर पहुंचते हैं। जहां पूरे गांव की रंगों की पिचकारी से पोखर के पानी में रंग डालकर गुलाबी किया जाता है। इसके पश्चात गाने के धुनों पर थिरकते हर वर्ग के लोग एक दूसरे को रंग डालते हैं। और जश्न मनाते हैं। ग्रामीणों की माने तो मूगलकाल से हीं मधुबनी जिला के अरेर से नीलकंठ झा और मणिकांत झा यहां आये थे।उन्हीं की संतति जब वृदांवन गये तो वहां की होली महोत्सव को देख अपने गांव में भी उसी तर्ज पर होली मनाने की मन में ठान ली।
तब से ही ग्रामीण इस विरासत को जीवंत बनाये रखा है। भिरहा की अनोखी होली देखने राष्ट्रकवि दिनकर, महाकवि आरसी प्रसाद सिंह, आचार्य सुरेंद्र झा ‘सुमन’ तथा राजनीति हस्तियों में भारत रत्न जन नायक कर्पूरी ठाकुर, विंदेश्वरी दूबे, जगनाथ मिश्र, रामविलास पासवान, रघुनाथ झा, पूर्व सांसद भोला सिंह जैसे महान हस्तियों का पर्दापन हो चुका है।
वहीं दूसरी ओर स्थानीय विधायक बीरेंद्र कुमार ने बिहार विधान सभा में भिरहा की होली की सांस्कृतिक महत्व को देखते हुये इसे राजकीय महोत्सव का दर्जा दिये जाने की मांग भी उठाया है वहीं विरासत से चली आ रही परंपरा निर्वहन को जीवंत बनाये रखने व प्रदेश में भिरहा गांव को राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान दिलाने के लिये ग्रामीण दढ संकल्पित हैं।
समस्तीपुर संवाददाता अफरोज आलम की रिपोर्ट