दो बार भाजपा के टिकट पर हार के बाद जन सुराज से मिली सफलता; सातवें वेतन आयोग का लाभ, वित्त रहित शिक्षाकर्मियों को वेतनमान और गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति दिलाने का संकल्प
डीएनबी भारत डेस्क
बेगूसराय के शिक्षाविद् डॉ. सुरेश प्रसाद राय उर्फ डॉ. सुरेश राय ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पारी को नया मुकाम दिया है। जन सुराज पार्टी के टिकट पर मिली इस जीत के बाद उनके बेगूसराय स्थित आवास पर बधाई देने वालों की भीड़ उमड़ रही है। सुबह से ही दर्जनों की संख्या में शिक्षक और समर्थक माला, बुके और मिठाइयां लेकर पहुंच रहे हैं। कोई माला पहनाकर तो कोई बुके भेंट कर उन्हें बधाई दे रहा है।

आवास पर लगातार हो रही आवाजाही के बीच उत्साह का माहौल बना हुआ है।लेकिन डॉ. सुरेश राय के लिए यह जीत केवल चुनावी सफलता नहीं, बल्कि वर्षों से शिक्षक राजनीति में किए जा रहे प्रयासों का अहम पड़ाव भी है। दो बार चुनाव हारने के बाद तीसरे प्रयास में उन्हें सफलता मिली है। अब उन्होंने शिक्षकों के हितों को लेकर अपनी प्राथमिकताएं भी स्पष्ट कर दी हैं।
जीत के बाद डॉ. सुरेश प्रसाद राय ने मतदाताओं और चुनाव में सहयोग करने वाले लोगों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने तन, मन और धन से सहयोग कर उन्हें शिक्षकों की आवाज बनने योग्य समझा है, उनके विश्वास पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे।डॉ. राय ने सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा का लाभ दिलाने, वित्त रहित शिक्षाकर्मियों को अनुदान के बदले वेतनमान दिलाने और शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त कराने को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों का उल्लेख उन्होंने अपने संकल्प पत्र में भी किया है।डॉ. सुरेश राय ने शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए निर्वाचन क्षेत्र के चारों जिलों में कार्यालय संचालित करने की योजना बताई।
उनके अनुसार, इन कार्यालयों में प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे, जो शिक्षकों की समस्याएं सुनेंगे और उन्हें दर्ज करेंगे।उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर समाधान योग्य मामलों का निपटारा वहीं कराने का प्रयास होगा, जबकि राज्य स्तर से जुड़ी समस्याओं को संबंधित अधिकारियों और कार्यालयों तक पहुंचाया जाएगा। उनका उद्देश्य शिक्षकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार भटकने से बचाना है।सरकारी आवास के उपयोग से जुड़े सवाल पर डॉ. राय ने कहा कि सदन में जाने के बाद उन्हें जो सरकारी आवास मिलेगा, उसमें एक कमरा छोड़कर शेष कमरों का उपयोग शिक्षक सेवा केंद्र के रूप में करने की योजना है।उन्होंने प्रशांत किशोर के बांकीपुर विधानसभा से निर्वाचित होने के बाद सरकारी आवास को जनसेवा केंद्र के रूप में संचालित किए जाने का उदाहरण दिया।
डॉ. राय ने कहा कि वह भी शिक्षकों के आशीर्वाद से सदन जा रहे हैं और अपने आवास के माध्यम से उनकी समस्याओं को सुनने की व्यवस्था करना चाहते हैं। इस योजना का क्रियान्वयन सरकारी आवास से संबंधित नियमों के अनुरूप ही संभव होगा।डॉ. सुरेश राय ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी राज्य और राष्ट्र का विकास तभी संभव है, जब शिक्षा उसकी प्राथमिकताओं में ऊपर हो और शिक्षकों को उचित सम्मान मिले।उन्होंने कहा कि वह बिहार सरकार और शिक्षा मंत्री के सामने शिक्षकों की समस्याओं को उठाएंगे। प्राथमिक विद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक शिक्षकों के सम्मान और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार प्रयास करना उनकी प्राथमिकता होगी।
डॉ. सुरेश राय पहले भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए थे। वह भाजपा के शिक्षक प्रकोष्ठ के प्रदेश सह-संयोजक भी रह चुके हैं। वर्ष 2014 और 2020 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
बाद में भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने जन सुराज का दामन थाम लिया। 1 सितंबर 2026 को दरभंगा में आयोजित जन सुराज की बैठक के दौरान उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। बैठक में बेगूसराय, समस्तीपुर, रोसड़ा, दरभंगा, मधुबनी और झंझारपुर से जुड़े कार्यकर्ता शामिल हुए थे। इसके बाद जन सुराज के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर उन्होंने जीत दर्ज की।5 जनवरी 1959 को जन्मे डॉ. सुरेश प्रसाद राय ने बेगूसराय के बीपी हाई स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद एमएससी और पीएचडी की उपाधि हासिल कर विज्ञान शिक्षक के रूप में लंबे समय तक अध्यापन किया। शैक्षणिक योगदान के लिए उन्हें राज्य सैद्धांतिक विज्ञान उत्कृष्ट शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने सामान्य विज्ञान विषय पर पुस्तक लेखन भी किया है।
बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के उद्देश्य से उन्होंने 30 दिसंबर 1981 को सुहृद्र बाल शिक्षा मंदिर की स्थापना की। वह ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय और कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के अधिषद सदस्य रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने बेगूसराय के एमआरजेडी कॉलेज के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभाई।बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में उन्होंने शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दे उठाए। 30 अप्रैल 2011 को बीपी हाई स्कूल से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद वह शिक्षक राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों में अधिक सक्रिय हो गए।दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीत के बाद डॉ. सुरेश राय के आवास पर शिक्षकों और समर्थकों का पहुंचना लगातार जारी है।
माला, बुके और मिठाइयों के साथ उनका स्वागत किया जा रहा है। दो चुनावों में असफलता के बाद मिली इस जीत ने उनके राजनीतिक सफर को नई दिशा दी है।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिक्षकों से किए गए वादों को पूरा करने के लिए वह किस तरह पहल करते हैं। सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा का लाभ, वित्त रहित शिक्षाकर्मियों को वेतनमान, गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति और चार जिलों में शिक्षक सेवा केंद्र स्थापित करने की उनकी घोषणाओं पर शिक्षक समुदाय की नजर रहेगी। डॉ. राय ने भरोसा दिलाया है कि वह शिक्षकों के सम्मान, अधिकार और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए लगातार प्रयास करेंगे।
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