डीएनबी भारत डेस्क
“नशे में कौन नहीं है, ज़रा हमें बताओ यहाँ…”—यह पंक्ति इन दिनों वीरपुर थाना क्षेत्र की ज़मीनी हकीकत पर पूरी तरह सटीक बैठती नज़र आ रही है। क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों में अवैध नशे का जाल इस कदर फैल चुका है कि नई पीढ़ी तेज़ी से इसकी गिरफ्त में समाती जा रही है।

थाना क्षेत्र के नौला, डीह, भवानंदपुर, वीरपुर पूर्वी, वीरपुर पश्चिम, गेन्हरपुर, जगदर, पर्रा, मैदा बभनगामा, सहुरी, और रतनमन बभनगामा समेत कई पंचायतों में अवैध देशी शराब के रूप में ज़हर का कारोबार बेखौफ फल-फूल रहा है। वहीं, विदेशी (अंग्रेजी) शराब के धंधेबाज तकनीकी कोड और आधुनिक तौर-तरीकों का सहारा लेकर 10 से 30 वर्ष के युवाओं व किशोरों के ज़रिए घर-घर डिलीवरी करवा रहे हैं।
सिर्फ शराब ही नहीं, बल्कि स्मैक और विभिन्न नशीले पदार्थों (ड्रग्स) के तस्कर भी क्षेत्र में सक्रिय हैं। शुरुआत में किशोरों और युवाओं को मुफ्त में लत लगाकर बाद में उन्हें अपना स्थायी ग्राहक बना लिया जाता है। इसके अलावा, हाट-बाज़ारों और चाय-पान की दुकानों पर गांजे की बिक्री की चर्चा आम है। भांग की दुकानें भी बेरोकटोक चल रही हैं। वहीं, 10 से 15 वर्ष के नाबालिगों में जूते चिपकाने वाले ‘सोल्यूशन’ (व्हाइटनर/एडहेसिव) को सूंघकर नशा करने का खतरनाक चलन भी देखा जा रहा है।
स्थानीय प्रबुद्धजनों, शिक्षकों और कानून-पसंद नागरिकों ने नाम न छापने की शर्त पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका आरोप है कि जब भी स्थानीय स्तर पर पुलिस या संबंधित अधिकारियों को नशा तस्करों की सूचना दी जाती है, तो छापेमारी से पहले ही धंधेबाजों को भनक लग जाती है और कई बार सूचना देने वाले की पहचान भी उजागर हो जाती है। इसके अलावा, यदि कभी कार्रवाई होती भी है, तो सफेदपोशों और रसूखदारों के दबाव का खेल शुरू हो जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू है, तो चेकपोस्ट, टोल प्लाजा और गश्ती दल के बावजूद इतनी बड़ी तादाद में नशीले पदार्थ कैसे पहुँच रहे हैं? लोगों के अनुसार, स्थिति इतनी चिंताजनक हो चुकी है कि अधिकांश घरों के युवा किसी न किसी रूप में नशे की चपेट में आ रहे हैं। यदि समय रहते इस अवैध कारोबार पर कड़ा प्रहार नहीं किया गया, तो यह सामाजिक ताने-बाने और युवाओं के भविष्य के लिए बेहद घातक साबित होगा।
बेगूसराय वीरपुर संवाददाता गोपल्लव झा की रिपोर्ट
