समस्तीपुर में मनरेगा घोटाला: 3.21 लाख की वाहा उड़ाही जांच में भारी बवाल, अधिकारियों पर लीपापोती और मिलीभगत का आरोप

DNB Bharat Desk

समस्तीपुर। जिले के उजियारपुर प्रखंड अंतर्गत लखनीपुर महेशपट्टी पंचायत स्थित वार्ड संख्या-01 में, पिछले हुए 3.21 लाख रुपये के ‘वाहा उड़ाही महाघोटाले’ में परत-दर-परत खौफनाक सच सामने आ रहे हैं। बिना मिट्टी काटे बिल पास करने, मज़दूर का जाली हस्ताक्षर करने और बैकडोर से पेमेंट निकालने के पुख्ता सबूत जब 13 अगस्त को पटना में मनरेगा आयुक्त के सामने रखे गए, तो डीआरडीए समस्तीपुर को 7 दिन का अल्टीमेटम मिला।

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आयुक्त की फटकार के बाद, आनन-फानन में जल संसाधन विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (नवीन कुमार) और डीआरडीए डायरेक्टर (संजीव कुमार) के नेतृत्व में 5 सदस्यीय उच्च स्तरीय टीम ग्राउंड ज़ीरो पर जांच करने पहुंची। लेकिन इस टीम ने निष्पक्ष जांच करने के बजाय लीपापोती, गुंडागर्दी और फिक्सिंग का ऐसा खेल खेला, जिसने पूरे सिस्टम को बेनकाब कर दिया है। नियमतः किसी भी जांच से पहले शिकायतकर्ता को सूचना देनी होती है। लेकिन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर नवीन कुमार और डीआरडीए डायरेक्टर बिना सूचना दिए गुपचुप साइट पर पहुँच गए। वहाँ से शिकायतकर्ता (श्याम कुमार शर्मा) को फोन कर अहसान जताते हुए कहा गया- “मैं एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बोल रहा हूँ… आ सकते हैं तो आइए, नहीं तो कोई बात नहीं।” जब शिकायतकर्ता ने बिना सूचना आने पर सवाल उठाया, तो साहब ने पद के अहंकार में कहा- “तेवर में बात मत कीजिए।

” यह साफ इशारा था कि अधिकारी सच की जांच करने नहीं, बल्कि ठेकेदार को बचाने की फिक्सिंग करने आए थे। साइट पर न्याय का जो मज़ाक उड़ा, वह खौफनाक था। वहाँ कुछ आम ग्रामीण तो मौजूद थे ही, लेकिन शिकायतकर्ता को डराने के लिए पंचायत के पूर्व मुखिया सह वर्तमान मुखियापति रिजवी उर्फ भाईजान ने 20 से 30 गुंडों की एक फ़ौज अलग से इकट्ठा कर रखी थी। पत्रकारों की टीम के पहुँचते ही इन गुंडों ने खुलेआम धमकी दी कि “अगर किसी ने वीडियो बनाया, तो सही-सलामत वापस नहीं जाएगा। हैरानी की बात यह थी कि डीआरडीए डायरेक्टर और इंजीनियर 15 मिनट तक मूकदर्शक बने यह गुंडागर्दी देखते रहे। इसके बाद सभी 5 अधिकारी एकांत में गए और आपस में एक ‘गुपचुप मीटिंग’ की। इस सीक्रेट मीटिंग के बाद जब उजियारपुर बीडीओ संजीव कुमार वाहा में नापी के लिए उतरे, तब जाकर एक सोची-समझी रणनीति के तहत वीडियो बनाने की अनुमति दी गई, जिसके बाद गुंडे शांत हुए।

समस्तीपुर में मनरेगा घोटाला: 3.21 लाख की वाहा उड़ाही जांच में भारी बवाल, अधिकारियों पर लीपापोती और मिलीभगत का आरोप 2जांच टीम ने दिनेश राय के घर से जमुआरी नदी तक वाहा की नापी की। कागजों को सही ठहराने के लिए 3 फीट गहरी और 8-9 फीट चौड़ी मिट्टी की कटाई दिखा दी गई। लेकिन कैमरे ने सबसे बड़ा झूठ पकड़ लिया— इतनी भारी मात्रा में मिट्टी काटने के बावजूद वाहा के दोनों किनारों पर मिट्टी का एक भी ढेर नहीं था। क्या काटी गई 3 फ़ीट मिट्टी हवा में उड़ गई? या मनरेगा के नियमों को ताक पर रखकर उस मिट्टी को रातों-रात माफियाओं को बेच दिया गया? अधिकारियों के पास इसका कोई जवाब नहीं था। मस्टर रोल में दर्ज 95% मज़दूर गाँव में ही रहते हैं, लेकिन काम पर कोई नहीं गया। अधिकारियों को पता था कि अगर असली मज़दूरों से पूछा गया तो फर्जी हाजिरी की पोल खुल जाएगी। खुद को बचाने के लिए अधिकारियों ने गाँव में मौजूद इन मज़दूरों को झूठा ‘प्रवासी’ बताकर दरकिनार कर दिया। सच्चाई छिपाने के लिए केवल 5-7 ऐसे लोगों से बयान लिया गया, जिन्हें पहले से ‘सेट’ किया गया था।

इनमें से 3-4 लोग तो एक ही परिवार के सदस्य थे। वहीं, जिस मज़दूर के फर्जी शपथ पत्र (जाली हस्ताक्षर) का खुलासा शिकायतकर्ता श्याम कुमार शर्मा ने किया था, उस पर अधिकारियों ने सिर्फ “हम जांच कर रहे हैं” कहकर पल्ला झाड़ लिया। अन्य योजनाओं की जांच में एक निजी व्यक्ति की ज़मीन (जहाँ पहले खेत था) पर रातों-रात जेसीबी से नाला काटकर पैसे निकालने का मामला सामने आया। जब वहाँ मौजूद स्थानीय लोगों ने अधिकारियों को सच्चाई बतानी चाही कि यहाँ जेसीबी मशीन चली है, तो डीआरडीए डायरेक्टर और इंजीनियर ने उन्हें डराते हुए कहा- “ये आपकी ज़मीन नहीं है तो आप कुछ मत बोलो, हमलोग को जो करना है वो कर रहे हैं।

शिकायतकर्ता श्याम कुमार शर्मा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि डीआरडीए की इस 5 सदस्यीय टीम द्वारा की गई यह लीपापोती और गुंडागर्दी कैमरे में कैद है। यह पूरी रिपोर्ट पटना में मनरेगा आयुक्त को सौंपी जाएगी। अगर इसके बावजूद भ्रष्ट एई, जेई, पीओ, पीआरएस और ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज नहीं होती है, तो इस मामले को सीधे माननीय न्यायालय में ले जाया जाएगा और मुकदमा दर्ज करवाकर इन सभी अधिकारियों को बेनकाब किया जाएगा।

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