डीएनबी भारत डेस्क
समस्तीपुर। उजियारपुर प्रखंड क्षेत्र के पतैली पूर्वी पंचायत के वार्ड संख्या-4, हसौली गांव से इंसानियत और सामाजिक सरोकार की एक भावुक तस्वीर सामने आई है। यहां एक बेहद गरीब परिवार के मुखिया, सूरदास मदन दास, का बीते 12 अगस्त को निधन हो गया था। उनके एक मात्र पुत्र मिथुन दास पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और परिवार के सामने अपने जीवन-यापन के साथ-साथ अंतिम संस्कार के बाद घर का चूल्हा जलाना भी बड़ी चुनौती बन गया था।बताया जा रहा है कि मृतक मदन दास दोनों आंखों से दृष्टिहीन थे और बेहद गरीबी में अपना जीवन गुजार रहे थे।

उनके निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति और भी दयनीय हो गई। ऐसे मुश्किल समय में परिवार को किसी सहारे की जरूरत थी।जब इस दुखद परिस्थिति की जानकारी गरीबों के मददगार के रूप में पहचान बना चुके युवा समाजसेवी भाई राजू सहनी को मिली, तो उन्होंने बिना किसी देरी के शोकाकुल परिवार की मदद करने का निर्णय लिया। उन्होंने अपनी टीम को हसौली गांव भेजकर परिवार के लिए कई महीनों की राशन सामग्री उपलब्ध कराई, ताकि दुख की इस घड़ी में परिवार को कम से कम भोजन की चिंता न करनी पड़े।मदद की यह पहल केवल राशन देने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह उस परिवार को यह एहसास दिलाने की कोशिश थी कि मुश्किल समय में समाज उनके साथ खड़ा है। जरूरतमंद परिवार के लिए समय पर पहुंचाई गई यह सहायता उनके लिए बड़ी राहत साबित हुई।मदद मिलने के दौरान परिवार के सदस्यों की आंखों में भावुकता साफ नजर आई।
स्थानीय लोगों ने भी भाई राजू सहनी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए ऐसे समय में आगे आना ही सच्ची इंसानियत है।इस मौके पर मिथुन कुमार, रामबाबू चौधरी, उप सरपंच ललन चौधरी, रमेश चौधरी, पंकज चौधरी, अमित कुमार, अमित कुमार सहित दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे,स्थानीय लोगों का कहना है कि दुख की घड़ी में किसी जरूरतमंद परिवार के घर तक मदद पहुंचाना समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है। भाई राजू सहनी की इस पहल ने एक बार फिर यह साबित किया कि इंसानियत अभी जिंदा है और जरूरतमंद के आंसू पोंछने के लिए समाज में आज भी ऐसे लोग मौजूद हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के मदद के लिए आगे आते हैं।
समस्तीपुर संवाददाता अफरोज आलम की रिपोर्ट