डीएनबी भारत डेस्क
वीरपुर बाजार में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, कनीय अभियंताओं और अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में कहावत है कि “जहां अंधेर नगरी होती है, वहां का राजा चौपट ही हुआ करता है”, और कुछ ऐसा ही हाल इन दिनों वीरपुर बाजार में देखने को मिल रहा है। वीरपुर सब्जी मार्केट से ईटवा गोसाईं चौक तक बनाए जा रहे नाले की सफाई, जीर्णोद्धार और ढक्कन निर्माण कार्य में जमकर भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी के आरोप लग रहे हैं।

स्थानीय दुकानदारों, ग्रामीणों और खरीदारों ने बताया कि नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी प्राक्कलन, कार्य की समय-सीमा, स्वीकृत राशि और उपयोग होने वाली सामग्री की जानकारी देने वाला कोई बोर्ड नहीं लगाया गया है। इस निर्माण में इंजीनियरिंग की बड़ी लापरवाही देखने को मिल रही है, जहां सड़क से नाले की ऊंचाई कहीं 6 इंच तो कहीं 12 इंच ऊंची बना दी गई है, जिससे यह स्पष्ट नहीं है कि सड़क का पानी नाले में जाएगा या नाले का पानी सड़क पर फैलेगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब जल निकासी की उचित व्यवस्था ही नहीं की जा रही है, तो इस नाले के निर्माण का क्या औचित्य? यह स्पष्ट रूप से जेई, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी धन की लूट और दुरुपयोग प्रतीत होता है। ग्रामीणों के अनुसार, लगभग 26 लाख रुपये से अधिक की लागत वाले इस कार्य को बिना किसी ग्राम सभा या वार्ड सदस्यों की बैठक के ही अपनी मर्जी से करवाया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
बेगूसराय वीरपुर संवाददाता गोपल्लव झा की रिपोर्ट