डीएनबी भारत डेस्क
असुरारी गांव का वातावरण बदला-बदला दिख रहा है। अहले सुबह छः बजे से ही राजकीयकृत मध्य विद्यालय असुरारी, नगर परिषद बीहट का परिसर संगीत की धुन पर थिरक रहा है। उनके साथ 13 गांव के 98 बच्चों का सामूहिक स्वराभ्यास और व्यायाम उनके मन और तन दोनों को रोमांचित कर रहा है।

सच है कि अब धीरे धीरे यहां का मौसम बदलने लगा है वातावरण सो रहा था अब आंख मलने लगा है। ये गीत इन दिनों रंग उमंग कार्यशाला के बच्चों के कलरव से आ रही है। ये बच्चे कल तक कला की विभिन्न विधाओं से अपरिचित थे, आज अपने जीवन के कई रंगों को पहचाना शुरू कर दिया है। ये जीवन जीने की कला सीख रहें हैं। ये प्रतिभागी विगत 7 जून से आकाश गंगा रंग चौपाल एसोसिएशन बरौनी द्वारा आयोजित शंभु साह स्मृति ग्रीष्मकालीन रंग कार्यशाला रंग उमंग में भाग ले रहे हैं।
लगभग 98 की संख्या में ये बच्चे अलग-अलग गांव से राजकीयकृत विद्यालय असुरारी पहुंच रहें हैं लेकिन इन बच्चों के स्वर एक हो चुके हैं। इनकी बोली एक हो चुकी है। इनका शोर, इनका उल्लास -उमंग सब कुछ एक जैसा दिख रहा है और यह प्रयास आकाश गंगा के सदस्य कलाकार कर रहे हैं। संस्था के लगभग 25 प्रशिक्षक रोज-ब-रोज अहले सुबह से लेकर दोपहर बाद तक बच्चों को कला की विभिन्न विधाओं से अवगत करा रहे हैं। कोई नृत्य, तो कोई नाटक, कोई चित्रकला तो कोई संगीत।
आप जिधर भी देखिए बच्चों की अपनी धुन है। कार्यशाला में भाग ले रही रूपा कहती है कि यह अवसर अब तक नहीं मिला था। इस अवसर के लिए मैं सभी प्रशिक्षकों का आभारी हूं। कार्यशाला में नृत्य सीख रही नैना, माही, काव्या का कहना है की सुदूर देहात में इस तरह से कभी भी हम बच्चों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का अनुभव नहीं मिल पाया था। आज हम सब प्रशिक्षित हो रहे हैं तो मन की उत्कंठा धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है।
जबकि कार्यशाला में भाग ले रही आयुषी, शांतनु, शिवानी, कृष, वैष्णवी, अस्मिता, अमृता, शालिनी, अर्चना, साक्षी, रागिनी, ऋतिका, राखी, आरुही, सत्यम, शिवांश, मौसम, सत्यम, अदिति, प्रहलाद, आरुषि, भारती सहित अन्य प्रतिभागी बच्चों ने कहा कि शायद जीवन में यह अद्भुत पल फिर नहीं मिल पायेगा। जहां इतने लोगों के साथ काम करने का मौका मिल रहा है। कार्यशाला के बच्चे अब धीरे-धीरे अपनी बात रखनी शुरू कर दी है। संगीत के सारेगामा से लेकर अभिव्यक्ति के सबसे सशक्त माध्यम नाटक से भी जुड़ रहे हैं।
कार्यशाला निर्देशक गणेश गौरव इन्हें खेल-खेल में कला की विभिन्न जानकारियों से लैस कर रहे हैं। संगीत प्रशिक्षक आनन्द, दिनेश दिवाना, अमर ज्योति, संतोष, येबलिराम, निखिल, कविता बच्चों को स्वर लय ताल के साथ नृत्य भी सीखा रहें हैं। फाइन आर्ट के मनीष कुमार, अंकित वर्मा ने रंग, माटी और कागज के माध्यम से कार्यशाला को रोचक बना दिया है। जबकि नृत्य में नरेश कुमार, साक्षी, अनिमेश, रोहित वर्मा अपना बेस्ट दे रहे हैं। नाटक को लेकर रवि वर्मा और कार्यशाला निर्देशक गणेश कुमार स्वयं बच्चों से रूबरू हो रहे हैं।
कार्यशाला में राधे, जितेंद्र शर्मा, शिक्षक कृष्णनंदन कुमार, गौरी कुमारी सहित अन्य प्रशिक्षक हर बच्चों के पीछे मेहनत से लगे हुए हैं। एसोसिएशन के सचिव गणेश गौरव कहते हैं कि आकाशगंगा रोज-ब-रोज काम करने वाली संस्था है ये केवल संगीत, नाटक, चित्रकला मात्र के लिए ही काम नहीं करती बल्कि सामाजिक मुद्दों को लेकर आम आवाम तक जाने वाली महत्वपूर्ण संस्था है। एसोसिएशन के अध्यक्ष सह कार्यशाला प्रभारी डॉ कुंदन कुमार कहते हैं कि कार्यशाला स्थानीय जन समुदाय की भागीदारी से आयोजित है।
जिसमें असुरारी, हवासपुर, पिपरादेवस, मालती, हाजीपुर, बथोली, बीहट, सिमरिया, चकिया, गढ़हरा, चकवल, तेघड़ा, छितनौर सहित 13 गांव के बच्चे इस कार्यशाला में अपनी उपस्थिति दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कार्यशाला को देखने सुनने गांव के अभिभावक, जनप्रतिनिधि रोज-ब-रोज अपनी उपस्थिति दे रहे हैं। स्थानीय बीहट नगर परिषद के मुख्य पार्षद बबीता देवी, उप मुख्य पार्षद ऋषिकेश कुमार, वार्ड पार्षद अशोक कुमार, जदयू नेता रामनरेश सिंह, प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह, पपरौर पैक्स अध्यक्ष हरिशंकर राय, असुरारी के सुनील कुमार, मिथिलेश कुमार, सन्तोष कुमार अपनी मेहनत से इस कार्यशाला को बेहतरीन बनाने में जुटे हुए हैं।
आलम यह है कि प्रतिभागी बच्चों के अभिभावक भी अब कार्यशाला में अपनी उपस्थिति देने लगे हैं और वे भी खुद को प्रतिभागी के रुप में देखना चाहते हैं । बहरहाल कार्यशाला अपने परवान पर है।
बेगूसराय बीहट संवाददाता धरमवीर कुमार की रिपोर्ट