डीएनबी भारत डेस्क
ग्रेटर नोएडा में आयोजित विश्व प्रसिद्ध IHGF दिल्ली फेयर में बिहार के पारंपरिक हस्तशिल्प की गूँज सुनाई दे रही है। हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (EPCH) के पटना कार्यालय द्वारा लगाए गए स्टॉल पर बिहार की मिट्टी की महक और कारीगरों की बारीकी अंतरराष्ट्रीय मंच पर आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस प्रमुख B2B अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में दुनिया भर के खरीदार बिहार की कला और संस्कृति से रूबरू हो रहे हैं।

कचरे से कंचन: जलकुंभी के उत्पादों ने खींचा ध्यान
इस प्रदर्शनी का सबसे बड़ा आकर्षण जलकुंभी (Water Hyacinth) से बने उत्पाद हैं। पहली बार जलकुंभी के कचरे का उपयोग कर बनाए गए आकर्षक फ्लावर बुके और अन्य उपयोगी सामान विदेशी खरीदारों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। इसके साथ ही बिहार की सुजनी कढ़ाई के पैच, झोला और ब्लॉक प्रिंट वाले कुशन कवर राज्य की समृद्ध कपड़ा कला की भव्यता को प्रदर्शित कर रहे हैं।
टिकुली और सिक्की आर्ट की बढ़ी डिमांड
होम डेकोर के क्षेत्र में टिकुली पेंटिंग से सजे ट्रे, मिरर और फोटो फ्रेम को काफी पसंद किया जा रहा है। वहीं, सिक्की क्राफ्ट से तैयार पारंपरिक गिफ्ट बॉक्स और यूटिलिटी बॉक्स प्रदर्शनी की शोभा बढ़ा रहे हैं। बच्चों के लिए जूट की गुड़िया और क्रोशिया (Crochet) के खिलौने भी एक नए आकर्षण के रूप में उभरे हैं।
कारीगरों को मिलेगा वैश्विक बाजार
EPCH पटना कार्यालय का मुख्य उद्देश्य बिहार के ग्रामीण कारीगरों के कौशल को सीधे अंतरराष्ट्रीय निर्यातकों के साथ जोड़ना है। इस मेले के माध्यम से बिहार के हस्तशिल्प को न केवल वैश्विक बाजार में नई पहचान मिल रही है, बल्कि बड़े ऑर्डर मिलने की भी प्रबल संभावना है। इससे राज्य के हस्तशिल्प क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
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