मानव समस्त चराचर के लिए पराक्रमी हो जाता है ऐसा मनोरथ पूर्ण करने वाली है असुरारी वाली मां जगदम्बा – मुकेश कुमार मिश्र

DNB Bharat Desk

मां जगदम्बा स्थान असुरारी में माता की दर्शन, पूजन, अराधना, उपासना,तप,जप, आरती, हवन-यज्ञ, संत सेवा, भंडारा आयोजित करने मात्र से ही भक्तों का सर्व सिद्धि, मनवांछित फल, यश, कृति,वैभव, आयु में वृद्धि, सभी बाधाएं दूर, सभी सिंचित पापों के समूहों का नास और मन का विकार दूर हो जाता है ।जिससे मानव समस्त चराचर के लिए पराक्रमी हो जाता है। ऐसा मनोरथ पूर्ण करने वाली है असुरारी वाली मां जगदम्बा। उक्त मार्मिक कथाएं भक्तों को संबोधित करते हुए  प्रसिद्ध पंडित तीलरथ निवासी मुकेश कुमार मिश्र ने कहा।

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वहीं पपरौर निवासी पंडित विष्णु झा ने कहा कि नवरात्रि के पांचवें दिन पूजी जाने वाली मां दुर्गा का पांचवां स्वरूप हैं। भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता होने के कारण इन्हें यह नाम मिला, और वे अपनी गोद में बाल रूप में कार्तिकेय को धारण करती हैं। देवी को मातृत्व, ममता, ज्ञान और शक्ति का प्रतीक माना जाता है, जो भक्तों की असीम अनुकंपा करती हैं। वहीं बनारस के प्रसिद्ध पण्डित माता के उपासक ज्ञानेश्वर कुमार ने माता के स्वरूप, पूजा मंत्र, शुभ रंग, भोग के संदर्भ कहा कि माता चार भुजाओं वाली हैं, जो कमल पर विराजमान रहती हैं या सिंह की सवारी करती हैं। मां का पूजा मंत्र: ॐ देवी स्कंदमातायै नमः।

मानव समस्त चराचर के लिए पराक्रमी हो जाता है ऐसा मनोरथ पूर्ण करने वाली है असुरारी वाली मां जगदम्बा - मुकेश कुमार मिश्र 2माता का शुभ रंग: पूजा में लाल रंग का उपयोग करना अत्यंत शुभ माना जाता है।भोग: माता को केले या अन्य पीले फल का भोग लगाया जाता है। वहीं माता की आराधक अनंतकोटी वैष्णव पारंबा जगदम्बा स्वरूपा संध्या कुमारी ने कहा कि स्कंदमाता की उपासना से साधक के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।उन्होंने कहा कि मान्यता है कि स्कंदमाता की कृपा से साधक का मन विशुद्ध चक्र में स्थित होता है और जीवन में दुष्ट प्रवृत्तियों का अंत होता है। वहीं चेती दूर्गा को लेकर यहां तैयारी का अंतिम स्वरूप दिया जा रहा है। माता की प्रतिमा प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा बनाया जा रहा है।

मानव समस्त चराचर के लिए पराक्रमी हो जाता है ऐसा मनोरथ पूर्ण करने वाली है असुरारी वाली मां जगदम्बा - मुकेश कुमार मिश्र 3प्रतिदिन यहां संध्या महाआरती में असुरारी, असुरारी गाछी टोला, पिपरा देवस, हाजीपुर,हवासपूर , पपरौर, बथौली, नगर परिषद बीहट सहित आस-पास व सुदूरवर्ती क्षेत्रों से भक्त आकर आकर्षक महाआरती में शामिल होते हैं। मौके पर पर पूजा समिति सहित समस्त ग्रामवासी याचक बनकर माता के भक्तों एवं माता की सेवा करने में तल्लीन रहते हैं। यहां महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है।

मानव समस्त चराचर के लिए पराक्रमी हो जाता है ऐसा मनोरथ पूर्ण करने वाली है असुरारी वाली मां जगदम्बा - मुकेश कुमार मिश्र 4ताकि माता के दरबार में आए श्रद्धालु भक्तगणों को दर्शन,पूजन,अराधना, उपासना,जप -तप, दृढ़ नेम, व्रत,आरती, हवन-यज्ञ,संत सेवा, भंडारा आयोजित करने में किसी भी प्रकार से कोई कठिनाई नहीं हो। यहां आने के लिए तीन प्रमुख मार्ग हैं। जिसमें एक अवध तिरहुत सड़क पर असुरारी स्कूल के सामने दक्षिण दिशा में जाने वाली प्रमुख ग्रामीण सड़क तथा जीरोमाइल,बीहट होल्ट, असुरारी गांव होते हुए ग्राम कचहरी के रास्ते आने का सुलभ मार्ग है। और एक मार्ग एन एच 28 पर मां शैल सर्विस पैट्रोल पंप के बगल से निकली मार्ग भी माता जगदम्बा के दरबार तक आती है।

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