आज़ होगी माता की कलशस्थापन और शैलपुत्री की आराधना पूजा
डीएनबी भारत डेस्क
असुरारी वाली जगदम्बा माता सत्य की उपासक हैं। सत्य ही परमेश्वर है और परमेश्वर ही सत्य है। जो मानव सत्य की पूजा नहीं करता है। वह परमेश्वर की भी पूजा नहीं करता है। सत्य न्याय, नीति और सदाचार के चार स्तम्भों पर धर्म की भव्य मन्दिर खड़ा है। धर्म की रक्षा के लिए ही माता पृथ्वी पर आई हैं। उक्त बातें देवी के अनन्य भक्त दिक्षित वैष्णव ब्रह्माणी वैष्णवी शक्ति स्वरूपा सुश्री संध्या कुमारी ने भक्तों को असुरारी स्थित मां जगदम्बा प्रांगण स्थित आयोजित चैती दुर्गा पूजा के अवसर पर माता के दर्शन की अपील करते हुए कहीं।

वहीं महर्षि गुरु विश्वामित्र के तपोस्थली और संत सनातन धर्म के सबसे आदर्श पुरुष पुरूषोत्तम श्रीरामचन्द्र जी के ज्ञानस्थली बक्सर के पंडित त्रिदंडी स्वामी के शिष्य माता के अराधक ज्ञानेश्वर कुमार ने कहा कि पहली शैलपुत्री, दूसरी ब्रह्मचारिणी, तीसरी चंद्रघंटा, चौथी कूष्मांडा, पांचवी स्कंध माता, छठी कात्यायिनी, सातवीं कालरात्रि, आठवीं महागौरी और नौवीं सिद्धिदात्री। ये मां दुर्गा के नौ रुप हैं।नवदुर्गा सनातन धर्म में भगवती माता दुर्गा जिन्हे आदिशक्ति जगत जननी जगदम्बा भी कहा जाता है। वहीं प्रसिद्ध पंडित तीलरथ निवासी मुकेश कुमार मिश्र ने कहा कि मां
शैलपुत्री माता (नवदुर्गा का प्रथम रूप) पर्वतराज हिमालय की पुत्री के रूप में अवतरित हुईं, इसलिए इन्हें शैलपुत्री (शैल = पर्वत, पुत्री = बेटी) कहा गया। पूर्व जन्म में सती के रूप में पिता दक्ष द्वारा शिव का अपमान सहन न कर यज्ञ अग्नि में प्राण त्यागने के बाद, उन्होंने हिमालय के घर पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया और पुन: शिव की अर्धांगिनी बनीं।नवरात्रि के प्रथम दिन शैलपुत्री माता की पूजा की जाती है।वे वृषभ (बैल) पर सवार हैं, उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल है।उन्हें शक्ति, दृढ़ता और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
असुरारी वाली बात साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं।
वहीं पपरौर के पण्डित विष्णुकांत झा ने बताया कि चैत्र नवरात्रि 2026 में कलश स्थापना (घटस्थापना) 19 मार्च को की जाएगी। सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 06:52 से 07:43 बजे तक है, और दूसरा शुभ अभिजीत मुहूर्त 12:05 से 12:53 बजे तक रहेगा। विधि में मिट्टी के पात्र में जौ बोकर, उस पर कलावा बंधा हुआ जल का कलश, आम के पत्ते और नारियल स्थापित कर गणेश व दुर्गा माता की पूजा करें। उन्होंने कहा 19 मार्च को राहुकाल 02:00 अपराह्न से 03:30 अपराह्न के बीच है, इस समय पूजा न करें। वहीं माता की प्रतिमा नामचीन कलाकारों द्वारा बनाया गया है।
यहां प्रतिदिन संध्या महाआरती में असुरारी, असुरारी गाछी टोला, पिपरा देवस, हाजीपुर, हवासपूर , पपरौर, बथौली, नगर परिषद बीहट सहित आस-पास व सुदूरवर्ती क्षेत्रों से भक्त आकर आकर्षक महाआरती में शामिल होते हैं। यहां बच्चों के लिए आकर्षक झुले लगाए जाएंगे। मौके पर पर पूजा समिति सहित समस्त ग्रामवासी याचक बनकर माता के भक्तों एवं माता की सेवा करने में तल्लीन रहते हैं। यहां महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। ताकि माता के दरबार में आए साधकों,श्रद्धालु भक्तगणों को दर्शन,पूजन,अराधना, उपासना,जप -तप, दृढ़ नेम, व्रत,आरती, हवन-यज्ञ,संत सेवा, भंडारा आयोजित करने में किसी भी प्रकार से कोई कठिनाई नहीं हो।
यहां आने के लिए तीन प्रमुख मार्ग हैं। जिसमें एक बरौनी ब्लॉक तीलरथ पथ अवध तिरहुत सड़क पर असुरारी स्कूल के सामने दक्षिण दिशा में जाने वाली प्रमुख ग्रामीण सड़क तथा जीरोमाइल,बीहट होल्ट, असुरारी गांव होते हुए ग्राम कचहरी के रास्ते आने का सुलभ मार्ग है। और एक मार्ग एन एच 28 पर मां शैल सर्विस पैट्रोल पंप के बगल से निकली मार्ग भी माता जगदम्बा के दरबार तक आती है।
बेगूसराय बीहट संवाददाता धरमवीर कुमार की रिपोर्ट