नालंदा: राजगीर में मलमास मेला से पहले सूखे गंगा-यमुना और व्यास कुंड, 17 मई से मलमास मेला,श्रद्धालुओं की बढ़ी चिंता

DNB Bharat Desk
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आस्था, परंपरा और करोड़ों श्रद्धालुओं की उम्मीदों से जुड़ा एक बड़ा सवाल इस वक्त राजगीर से सामने आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त राजगीर में हर तीन साल मे लगने वाला ऐतिहासिक मलमास मेला इस बार 17 मई से 15 जून तक आयोजित होगा।

 जिला प्रशासन तैयारियों में जुट गया है, लेकिन मेले से पहले ही एक गंभीर संकट ने दस्तक दे दी है।प्राचीन मान्यताओं के अनुसार मलमास मेला के दौरान 33 करोड़ देवी-देवता राजगीर के 22 कुंडों और 52 धाराओं में स्नान करते हैं। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचकर शाही स्नान करते हैं और पुण्य अर्जित करते हैं। लेकिन इस बार स्थिति चिंताजनक है। 

नालंदा: राजगीर में मलमास मेला से पहले सूखे गंगा-यमुना और व्यास कुंड, 17 मई से मलमास मेला,श्रद्धालुओं की बढ़ी चिंता 2राजगीर के प्रसिद्ध गंगा, यमुना और व्यास कुंड पूरी तरह से सूख चुके हैं। गर्मी अपने चरम पर भी नहीं पहुंची है और पवित्र कुंडों का जलस्तर खत्म हो जाना प्रशासन और स्थानीय लोगों के लिए बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।स्थानीय पुजारी विकास उपाध्याय का कहना है कि लगातार ट्यूबवेल के बढ़ते इस्तेमाल का असर अब सदियों पुराने कुंडों पर साफ दिखाई देने लगा है।

नालंदा: राजगीर में मलमास मेला से पहले सूखे गंगा-यमुना और व्यास कुंड, 17 मई से मलमास मेला,श्रद्धालुओं की बढ़ी चिंता 3 हर साल गर्मियों में जलस्तर घटता था, लेकिन इस बार तो समय से पहले ही कुंड सूख गए। उनका आरोप है कि पांडु पोखर में ट्यूबवेल निर्माण के बाद से ही गर्म कुंडों के जलस्रोत प्रभावित हुए हैं।एक महीने तक चलने वाले इस भव्य मेले में लाखों श्रद्धालु शाही स्नान की परंपरा निभाते हैं। लेकिन अगर हालात ऐसे ही रहे, तो इस बार श्रद्धालुओं को मायूस होकर लौटना पड़ सकता है।

जिला प्रशासन को इस गंभीर समस्या से अवगत करा दिया गया है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन समय रहते गंगा, यमुना और व्यास कुंड को पुनर्जीवित कर पाएगा?

डीएनबी भारत डेस्क

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