डीएनबी भारत डेस्क
मॉडल अस्पताल से मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पताल ले जाने के मामलों पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मॉडल अस्पताल से आशा कार्यकर्ताओं द्वारा गरीब और अशिक्षित मरीजों को बरगलाने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह मामला डीएम तक पहुंचा, जिसके बाद प्रशासन द्वारा कड़ा कदम उठाया गया।

जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने अस्पताल परिसर के संवेदनशील स्थानों पर एआई कैमरे लगाने का निर्देश दिया है। ये कैमरे मरीजों को निजी अस्पताल ले जाने से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखेंगे। डीएम ने सिविल सर्जन को मरीजों की सुविधा के साथ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। डीएस डॉ राजीव रंजन ने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं के साथ-साथ गार्डों द्वारा ड्यूटी में लापरवाही की शिकायतें भी मिल रही हैं। ऐसे में दोनों की गतिविधियों की निगरानी जरूरी हो गई है। एआई कैमरों की मॉनिटरिंग प्रतिदिन की जाएगी।
फिलहाल अस्पताल में 50 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। डीएम के निर्देश पर तीन प्रमुख स्थानों लेबर वार्ड, इमरजेंसी,एक्सरे रूम के अलावे जितने भी अति संवेदनशील जगह है उन सभी जगहों पर एआई कैमरे लगाए जाएंगे। प्रशासन का मानना है कि इससे अस्पताल में पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होगी।जिससे बच्चा चोरी के साथ साथ बिचौलियों पर पैनी नजर अस्पताल प्रवधन की रहेगी. मॉडल अस्पताल बिहार शरीफ सूबे का पहला सरकारी अस्पताल होगा जहाँ ऐ आई कैमरे से निगरानी होंगी और यह व्यवस्था जनवरी माह मे ही शुरू किया जायेगा.
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