डीएनबी भारत डेस्क
बरौनी। बेगूसराय जिला के बरौनी प्रखंड अंतर्गत नींगा पंचायत के लदौरा गांव में आयोजित तीन दिवसीय आवामी दावत-ए-इज्तेमा का शुक्रवार को सामूहिक दुआ के साथ समापन हो गया।

आयोजकों एवं स्थानीय लोगों के अनुमान के मुताबिक इस तीन दिवसीय इज्तेमा में करीब पांच लाख से अधिक लोगों ने शिरकत की। बेगूसराय जिले सहित बिहार के विभिन्न जिलों और दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग इज्तेमा में पहुंचे। तीन दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन में दीन, ईमान, नमाज, इंसानियत, आपसी मोहब्बत और भाईचारे से जुड़ी तकरीरें हुईं।
इज्तेमा में दिल्ली स्थित हजरत निजामुद्दीन मरकज से पहुंचे उलेमा-ए-दीन मौलाना महमूद साहब बस्ती,मौलाना फारूक, मुफ्ती कमर नसीम, मौलाना अब्दुल्लाह और मौलाना फारूक अकोला ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि इंसान को हमेशा अपने आमाल का जायजा लेना चाहिए और अल्लाह की राह पर चलते हुए जिंदगी गुजारनी चाहिए। उन्होंने लोगों से बुराइयों, नशाखोरी, हरामखोरी, शराब और आपसी नफरत से दूर रहने की अपील की।
मौलाना महमूद साहब बस्ती इज्तेमा का हेड ने कहा कि इस्लाम मोहब्बत, रहमत और इंसानियत का पैगाम देता है। किसी के साथ नाइंसाफी नहीं करनी चाहिए और न ही किसी का हक मारना चाहिए। इंसान की जिंदगी का मकसद केवल दुनिया की दौलत और शोहरत हासिल करना नहीं, बल्कि अच्छे आमाल के जरिए अल्लाह की रजा हासिल करना भी है।
इज्तेमा के दौरान मौलाना महमूद निजामुद्दीन दिल्ली मरकज ने अपनी दुआ में बेहद भावुक अंदाज में कहा कि ऐ अल्लाह! हम गुनहगार हैं, खताकार हैं, बदकार हैं, लेकिन तेरे बंदे हैं और तेरे दर के सवाली हैं। ऐ अल्लाह! तू रहीम है, हम पर रहम फरमा। हमारी गलतियों और गुनाहों को माफ कर दे। ऐ अल्लाह! सारी दुनिया को इस्लाम के नूर से रोशन कर दे। पूरी कायनात में अमन, सुकून, सलामती और भाईचारे की फिजा कायम फरमा।
उन्होंने दुआ में मुल्क की तरक्की, खुशहाली, आपसी मोहब्बत और पूरी इंसानियत की हिफाजत की भी गुजारिश की। मौलाना ने कहा कि दुआ सबसे बड़ा मरहम है और हर मुश्किल के खिलाफ अल्लाह से अपनी बात कही जा सकती है। दुआ के दौरान फरिश्ते भी आमीन कहते हैं, इसलिए हर दुआ पर आमीन कहना जरूरी है। उन्होंने लोगों को समझाया कि दुआ की कबूलियत के लिए ईमान के साथ हलाल रोजी कमाना, हलाल खाना और तमाम बुराइयों से बचना बेहद जरूरी है।
पंडाल में नहीं मिली जगह तो जमीन पर बैठकर मांगी दुआएं
इज्तेमा के अंतिम दिन लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दूर-दराज से आने वाले लोगों का सिलसिला सुबह से ही जारी रहा। भीड़ इतनी अधिक थी कि पंडाल में बैठने के लिए जगह कम पड़ गई। जगह नहीं मिलने पर बड़ी संख्या में लोग खुले मैदान और जमीन पर बैठकर उलेमा-ए-दीन की तकरीर सुनते तथा सामूहिक दुआ में शामिल होते नजर आए।
इज्तेमा स्थल पर चारों तरफ लोगों की भीड़ दिखाई दे रही थी। शुक्रवार को अंतिम सामूहिक दुआ के समय पूरा माहौल रूहानी हो गया। हजारों की संख्या में लोगों ने हाथ उठाकर अपने गुनाहों की माफी मांगी। कई लोग दुआ के दौरान भावुक भी नजर आए।
चिकित्सा शिविर से लेकर सुरक्षा तक किए गए थे इंतजाम
तीन दिवसीय आयोजन के दौरान आने वाले लोगों की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे। इज्तेमा स्थल पर मेडिकल टीम द्वारा चिकित्सा शिविर लगाया गया था, जहां जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा और विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी की जा रही थी।
इसके अलावा पेयजल, पानी टंकी, रोशनी, साफ-सफाई और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था भी की गई थी।
इज्तेमा को सफल बनाने में मौलाना फरहान साहब, मो. शकील, मास्टर एजाज खान, मो. अज़हर खान, डॉ. बसीर, मास्टर असद, मो. अफाक अख्तर हुकूमत, मुफ्ती शादाब, मुफ्ती अब्दुल जब्बार, मास्टर अज़हर कमाल, डॉ. मुजफ्फर इकबाल, मुफ्ती इनाम, मौलाना कलाम, मुफ्ती मुजाहिद इस्लाम, गुड्डू खान, मो. शाहिद, मो. तौकीर आलम, मो. शहबाज और डॉ. मजहर सहित कई लोगों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
आयोजन समिति के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने व्यवस्था संभालने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।शुक्रवार को सामूहिक दुआ के दौरान मुल्क में अमन-चैन, तरक्की और खुशहाली, समाज में आपसी सद्भाव, परिवारों में मोहब्बत, नौजवानों की हिफाजत तथा पूरी दुनिया में इंसानियत की सलामती के लिए दुआ मांगी गई। सामूहिक दुआ के साथ ही तीन दिवसीय आवामी दावत-ए-इज्तेमा का शांतिपूर्ण समापन हो गया।
डीएनबी भारत डेस्क