डीएनबी भारत डेस्क
सनातन धर्म अपौरुषेय है,शास्वत है,एकाकी है, इसका मतलब इसका ना अंत होता है। सनातन धर्म का आज तक किसी ग्रंथ में न आदि है न अंत है और जिसे कोई बनाया भी नहीं है, सभी ऋषि मुनि सनातनी परंपरा से जुड़े हुए हैं।

जिन पर सारे अंक हैं सारे अक्षर हैं जैसे सूर्य का कोई प्रमाण नहीं होता वैसे सनातन धर्म का कोई प्रमाण आज तक नहीं मिला है जैसे सूर्य के प्रमाण की कोई आवश्यकता नहीं जैसे चंद्रमा के प्रमाण की कोई आवश्यकता नहीं वैसे ही सनातन धर्म के प्रमाण की कोई आवश्यकता नहीं,
भारतीय संस्कृति की पहचान सनातन धर्म है कहा गया है कि सूर्य से ही पृथ्वी है और सूर्य से ही चौरासी लाख योनियों हैं, और जो व्यक्ति जो मानव जो पुण्यात्मा दीर्घायु रहना चाहते हैं।
दीर्घ जीवी रहना जो व्यक्ति चाहता है कि हमारे सारे रोग सारे कष्ट सारी बधाएं दूर हो उसको सूर्य भगवान की उपासना जरूर करनी चाहिए। कहा गया है कि सूर्य भगवान प्रत्यक्ष देव है जिनको हम सभी प्राणी अपनी आंखों से अपने चक्षुओं से रोज प्रत्यक्ष दर्शन करते हैं इसीलिए पृथ्वी पर सूर्य और चंद्रमा का कोई प्रमाण नहीं।
बेगूसराय बीहट संवाददाता धरमवीर कुमार की रिपोर्ट