एक्टिव कल्चरल सोसाइटी के कलाकारों ने दिया परस्तुति।
डीएनबी भारत डेस्क

कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार तथा जिला प्रशासन, बेगूसराय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राजकीय कल्पवास मेला, सिमरिया धाम, बेगूसराय की सांस्कृतिक संध्या के नवें सत्र में एक्टिव कल्चरल सोसाइटी, बेगूसराय के कलाकारों ने शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति कर दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में लोकगीत, भक्ति संगीत एवं पारंपरिक लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने कल्पवास मेला के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण को और भी जीवंत बना दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ रंजीत राय ने माँ गंगा की महिमा का बखान करते हुए “माँ गंगा की कृपा से सब काम हो रहा है” एवं “सिमरिया लागल बाटे कल्पवास मेलवा” गीत की प्रस्तुति से किया। इसके बाद दिव्यांका भारद्वाज ने छठ गीत “केलवा के पात पर उगेलन सुरुजमल” एवं “कोयल बिन बगिया ना शोभे राजा” प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। लालू बिहारी ने “दीवाना तेरा आया मैया तेरी नगरी में” एवं “सबटा कृपा बा महारानी के, हम त बुलबुला बा पानी के” गीत से भक्ति भाव का संचार किया। वहीं जान्हवी कुमारी ने “धन्य-धन्य महिमा तोहार गंगा मैया हो”, आरती कुमारी ने “काठ ही काठ के कोठरीया” तथा कशिश कुमारी ने “मांगी ला हम वरदान हे गंगा मैया” गीत की प्रस्तुति दी।
इसी क्रम में प्रीति कुमारी ने “तुम उठो सिया श्रृंगार करो, शिव धनुष राम ने तोड़ा है” तथा पुष्पांजलि कुमारी ने “उग हे सुरुज देव अर्घ के बेरिया” गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। गीतों की प्रस्तुति में संगत कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हारमोनियम पर रंजीत राय, पैड पर कन्हैया कुमार, नाल पर आकाश कुमार तथा ऑर्गन पर प्रणव कुमार पाठक ने अपनी उत्कृष्ट संगत से कार्यक्रम को और भी प्रभावशाली बनाया। गीत-संगीत की प्रस्तुति के उपरांत मनोज कुमार के निर्देशन में खुशी कुमारी, वैष्णवी कुमारी, कल्पना कुमारी, रूपम कुमारी एवं मनीषा कुमारी ने बिहार की पारंपरिक लोकनृत्य शैलियों जट-जटिन एवं झिझिया की आकर्षक प्रस्तुति दी।
पारंपरिक लोकधुनों और मनमोहक नृत्य भाव-भंगिमाओं ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया। इस अवसर पर एक्टिव कल्चरल सोसाइटी, बेगूसराय के सचिव इम्तियाज उल हक ‘डब्लू’ भी उपस्थित रहे। मंच एवं कार्यक्रम का सफल संचालन मनीष कौशिक ने किया। कार्यक्रम के अंत में जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्याम कुमार सहनी ने सभी कलाकारों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। सांस्कृतिक संध्या का यह सत्र लोकसंस्कृति, भक्ति और पारंपरिक कलाओं के सुंदर संगम के रूप में यादगार रहा।
बेगूसराय बीहट संवाददाता धरमवीर कुमार की रिपोर्ट