मिथिला की सीमा पर बसा सिमरिया धर्म, अध्यात्म और साहित्य की भूमि है- स्वामी चिदात्मन जी महाराज

DNB Bharat Desk

मिथिला की सीमा पर बसा सिमरिया धर्म, अध्यात्म और साहित्य की भूमि है। उक्त बातें रविवार को सर्वमंगला अध्यात्म योग विद्यापीठ सिमरिया धाम में दिनकर जयंती समारोह के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए स्वामी चिदात्मन महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि दिनकर विश्वकवि हैं। उनके ज्ञान से सिमरिया आने वाले देशभर के संत श्रद्धालू ज्ञान के प्रकाश से आलोकित होंगे।

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राष्ट्रकवि दिनकर की आदमकद प्रतिमा अमृत सरोवर के बीच सिमरिया में स्थापित होनी चाहिए। इस स्वरूप के लिए उचित स्थान सिमरिया का गोलंबर है।  दिनकर स्मृति विकास समिति के तत्वावधान में आयोजित 118वीं दिनकर जयंती के पहले दिन बीएचयू के प्राध्यापक रामाज्ञा शशिधर ने कहा कि दिनकर मूर्ति नहीं विचार हैं। मूर्ति वही जिंदा रहती है जिसमें विचार व स्वप्न जिंदा रहता है। सिमरिया घाट बाया व गंगा का संगम है। यहां साहित्यिक नवजागरण का एक केंद्र बनता जा रहा है। दक्षिण भारत में महान कवि तिरूवल्लुवर का जो सम्मान है वही सम्मान दिनकर का सिमरिया में है। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण प्रियदर्शी, स्वागत भाषण रामनाथ सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन विश्वंभर सिंह ने किया।

मिथिला की सीमा पर बसा सिमरिया धर्म, अध्यात्म और साहित्य की भूमि है- स्वामी चिदात्मन जी महाराज 2कार्यक्रम को उमेश कुंवर, संतोष ईश्वर, आनन्द शंकर, संजीव फिरोज सहित कई अन्य ने सम्बोधित किया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में वरिष्ठ कवि प्रफुल्ल मिश्र, रमा मौसम, विद्यासागर ब्रह्मचारी, राजीव रंजन, विनोद बिहारी, एके मनीष आदि ने कविता पाठ किया। वहीं मौके पर कृष्ण कुमार शर्मा, सूरज कुमार, अजीत कुमार, अमित कुमार समेत अन्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम के प्रारंभ में आगत अतिथियों ने दिनकर के तैल्य चित्र पर माल्यार्पण किया वहीं स्वामी चिदात्मन महाराज ने उपस्थित अतिथियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया।

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