डीएनबी भारत डेस्क
करोड़ों की लागत से बनी बिहार का सबसे हाईटेक एवं मॉडल सदर अस्पताल बेगूसराय एक बार फिर उस वक्त सुर्खियों में आ गई जब एक शव को छत नसीब नहीं हुआ और लाश घंटो बारिश की पानी में भीगता रहा। तथा परिजन सदर अस्पताल, नगर थाना एवं बलिया थाना का चक्कर काटते रहे। सबसे बड़ी संवेदनहीनता उस वक्त सामने आई जब परिजनों के अलावे कोई भी स्वास्थ्य कर्मी या पुलिसकर्मी उस शव को देखने तक नहीं पहुंचे।

सदर अस्पताल की ओर से कहा जाता रहा कि पहले नगर थाना से लिखवा कर लाना होगा तब शव का पोस्टमार्टम होगा । वहीं जब परिजन नगर थाना पहुंचे तो उन्हें बलिया थाना भेज दिया गया। लेकिन वहां भी परिजनों को इंसाफ नहीं मिला आखिरकार 15 घंटे बाद नगर थाना से पोस्टमार्टम के लिए पर्ची काटी गई तब जाकर शव का पोस्टमार्टम हो सका। बेगूसराय मे सिस्टम की लापरवाही का एक बड़ा दर्दनाक नजारा सदर अस्पताल मे देखने को मिला है जहाँ पोस्टमार्टम के इंतजार मे एक डेड बॉडी कई घंटे तक पानी मे भींगता रहा है बल्कि पोस्टमार्टम के इंतजार मे सुबह से शाम परिजन डेड बॉडी को लेकर इधर से उधर भटकते रहे। इतना ही नहीं इंसानियत तब और शर्मशार हो गई जब परिजन सदर अस्पताल से बलिया थाना, बलिया थाना से नगर थाना तक भटकते रहे।
बाद मे परिजनों के हो हंगामा के बाद सदर अस्पताल के कर्मियों नें शव को पोस्टमार्टम रूम मे भेजनें को तैयार हुए। बुधवार को इस नजारे को देखकर ना सिर्फ परिजन बल्कि हर जाननें वाले लोग सिस्टम को कोसते नजर आये। बताते चले की 13 जुलाई को बलिया थाना क्षेत्र के बड़ी बलिया वार्ड नंबर दस के रहने वाली सुशीला देवी सड़क हादसे का शिकार हो गई। सुचना के बाद बलिया थाना की पुलिस महिला की हालत को देखते हुए इलाज के लिए सदर अस्पताल मे भर्ती कराया। इलाज के दौरान महिला की हालत मे सुधार हुआ तो उसे घर भेज दिया गया। जहाँ मंगलवार की रात महिला की मौत हो गई।। मौत की सुचना के बाद परिजनों नें इसकी सुचना बलिया थाना को दी। परिजनों के अनुसार बलिया थाना नें शव को पोस्टमार्टम कराने की बात कही। जिसके बाद बुधवार को परिजन पोस्टमार्टम के लिए शव लेकर सदर अस्पताल पहुंचे। अस्पताल के कर्मियों नें शव को लेने से इंकार कर दिया और इसके लिए पुलिस रिपोर्ट की मांग की।
परिजनो के मुताबिक शव को भारी बारिश मे छोड़ कर परिजन बलिया थाना गए। बलिया थाना द्वारा नगर थाना को पोस्टमार्टम के लिए बोलने की बात कही गई। आरोप है की बलिया से नगर थाना पहुंचने पर नगर थाना द्वारा ऎसी किसी सुचना से इंकार किया। इस दौरान कई घंटे बीत गए। बाद मे परिजनों नें बताया की डीएम और वरीय पुलिस अधिकारीयों को इसकी सुचना देने की बात कहने पर पोस्टमार्टम स्लिप दिया गया तब जाकर शव को पोस्टमार्टम रूम मे रखा जा सका। कुल मिलाकर सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा जिंदा को नहीं बल्कि एक मुर्दा को भी उठाना पड़ा। जिसकी चर्चा आज हर तरह हो रही है।
वही जब सदर अस्पताल के डी एस अखिलेश कुमार से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने पूरी जानकारी लेने के बाद कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों की इसमें कोई गलती नहीं है नियमानुसार पुलिस के द्वारा जब पोस्टमार्टम के लिए लाया जाता है तब जाकर किसी भी शव का पोस्टमार्टम होता है यहां पर पुलिस के द्वारा लापरवाही की गई है जिन्होंने तकरीबन 15 घंटे बाद एक्सीडेंटल डेथ सर्टिफिकेट दिया और जैसे ही अस्पताल प्रबंधन को वह प्राप्त हुआ अस्पताल प्रबंधन ने तुरंत शव का पोस्टमार्टम किया। यहां पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं जैसे कि अगर किसी परिस्थिति में शव को सदर अस्पताल लाया गया तो शव के सुरक्षा की जिम्मेवारी किसकी है। आखिर पुलिस या स्वास्थ्य कर्मी इतने संवेदनहीन कैसे हो सकते हैं।
डीएनबी भारत डेस्क