बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन पहुंचे नालंदा, ह्वेनसांग मेमोरियल का किया भ्रमण, नालंदा खुला विश्वविद्यालय में आयोजित कई कार्यक्रम में की शिरकत

DNB Bharat Desk
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बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त)सैयद अता हसनैन शुक्रवार को नालंदा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने नव नालंदा महाविहार और नालंदा खुला विश्वविद्यालय में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।

 आगमन पर राज्यपाल को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उन्होंने ह्वेनसांग मेमोरियल का भ्रमण भी की। नालंदा खुला विश्वविद्यालय में राज्यपाल ने ऑनलाइन क्लासरूम स्टूडियो और मास कम्युनिकेशन स्टूडियो का उद्घाटन किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति, शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। 

बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन पहुंचे नालंदा, ह्वेनसांग मेमोरियल का किया भ्रमण, नालंदा खुला विश्वविद्यालय में आयोजित कई कार्यक्रम में की शिरकत 2अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि उनकी प्राथमिकता बिहार में उच्च शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि वे राज्य के सभी विश्वविद्यालयों का दौरा करेंगे और शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में बदलाव रातों-रात संभव नहीं है, लेकिन चरणबद्ध तरीके से निश्चित रूप से सुधार होगा। 

बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन पहुंचे नालंदा, ह्वेनसांग मेमोरियल का किया भ्रमण, नालंदा खुला विश्वविद्यालय में आयोजित कई कार्यक्रम में की शिरकत 3न्होंने नालंदा खुला विश्वविद्यालय पर भरोसा जताते हुए कहा कि यहां से उन्हें सकारात्मक उम्मीदें हैं। अपने संबोधन में राज्यपाल ने ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया और पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झूठा नैरेटिव गढ़कर यह प्रचारित कर रहा है कि उसने ऑपरेशन सिंदूर में सफलता हासिल की, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है।

 बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन पहुंचे नालंदा, ह्वेनसांग मेमोरियल का किया भ्रमण, नालंदा खुला विश्वविद्यालय में आयोजित कई कार्यक्रम में की शिरकत 4उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान संचार माध्यमों का दुरुपयोग कर दुनिया भर में भ्रामक प्रचार कर रहा है। राज्यपाल ने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान 6 सितंबर को ‘विक्ट्री डे’ के रूप में मनाता है, जबकि उस युद्ध में उसे हार का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि आज के दौर में प्रभावी संचार और सही तथ्यों को दुनिया के सामने रखना बेहद आवश्यक है, क्योंकि गलत नैरेटिव भी लोगों की सोच को प्रभावित कर सकता है।

डीएनबी भारत डेस्क

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