बिहार के मिलेट्स अब दुनिया में मचाएंगे धूम: 57 करोड़ का निर्यात, विदेशों में बढ़ रही ‘मोटे अनाज’ की मांग

DNB Bharat Desk

बरौनी प्रखण्ड मुख्यालय में प्रखण्ड कृषि पदाधिकारी बरौनी आयुष सिंह के नेतृत्व में आत्मा बरौनी परिवार द्वारा खरीफ (शारदीय) महोत्सव प्रशिक्षण के साथ ही प्रखण्ड क्षेत्र में 11 से 24 जून तक किसान चौपाल आयोजित कर खरीफ़ में बोए जाने वाली प्रमुख फसलों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी बीएओ आयुष सिंह, बीएचओ सुगन्धि कुमारी,बीटीएम बरौनी आरती कुमारी,एटीएम ज्ञानेश्वर कुमार, कुन्दन कुमार, कृषि समन्वयक निकेश कुमार, राजकिशोर कुमार, नवीन कुमार, राकेश कुमार एवं सलाहकार सहित सभी प्रसार कर्मियों द्वारा दिया गया है।

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जिसे काफ़ी गम्भीरता से लेने और समझने का जरूरत है । कृषक प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, संतुलित रासायनिक प्रयोग, अत्याधुनिक खेती, वैज्ञानिक खेती और बिहार में बोए जाने वाली प्रमुख मोटे अनाज जिसका आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग बढ़ रही है। इसपर भी किसानों को अमल करना होगा शारदीय खरीफ महोत्सव प्रशिक्षण और किसान चौपाल तभी सफ़ल माना जाएगा। फ़सलों का उच्च मूल्य पाने के लिए मानकों के अनुरूप होना अत्यावश्यक है। इसके लिए जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, संतुलित रासायनिक प्रयोग करना होगा। आज बिहार से मोटे अनाजों (जैसे मक्का, रागी/मड़ुआ और बाजरा) का विदेशों में निर्यात तेजी से बढ़ रहा है। वर्तमान में राज्य से लगभग ₹57 करोड़ के मिलेट उत्पाद अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और यूएई भेजे जा रहे हैं। मखाना भी ग्लोबल सुपरफूड के रूप में भारी मात्रा में निर्यात किया जा रहा है।

बिहार देश के प्रमुख मक्का उत्पादक राज्यों में से एक है, जिसकी भारी मांग बांग्लादेश, वियतनाम और अन्य एशियाई देशों में है। वहीं बिहार के मिलेट उत्पादों की वैश्विक मांग बढ़ रही है, जिससे अमेरिका, कनाडा और यूएई जैसे देशों में निर्यात के नए अवसर खुले हैं। वर्तमान में बिहार से 57 करोड़ रुपये के मिलेट का निर्यात हो रहा है, जिसमें रागी और बाजरा प्रमुख हैं। बताते चलें कि वर्तमान में बिहार से लगभग 57 करोड़ रुपये मूल्य के मिलेट उत्पादों का निर्यात हो रहा है, जो देश के कुल मिलेट निर्यात का करीब 10.6 प्रतिशत है। मोटे अनाज (मिलेट) के उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में बिहार तेजी से अपनी अलग पहचान बना रहा है। स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों की बढ़ती वैश्विक मांग के बीच बिहार के मिलेट उत्पादों के लिए अमेरिका, कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में नए अवसर खुल रहे हैं।

बिहार के मिलेट्स अब दुनिया में मचाएंगे धूम: 57 करोड़ का निर्यात, विदेशों में बढ़ रही 'मोटे अनाज' की मांग 2राज्य में प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग), ब्रांडिंग और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) पर ध्यान दिया जाए तो बिहार आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख मिलेट निर्यातक राज्यों में शामिल हो सकता है।इधर देखें तो रागी, बाजरा और अन्य मोटे अनाजों की मांग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक देशों (जैसे यूरोप और मध्य पूर्व) में तेजी से बढ़ी है। वहीं रागी और बाजरा बने निर्यात की ताकत।

अंतरराष्ट्रीय एक्सपोर्ट एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार बिहार के कुल मिलेट उत्पादन में रागी की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत है, जबकि बाजरा 33 प्रतिशत, स्माल मिलेट्स 16 प्रतिशत और ज्वार 14 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में आधुनिक प्रोसेसिंग और पैकेजिंग सुविधाओं का विकास होने पर निर्यात क्षमता कई गुना बढ़ सकती है।कच्चे अनाज नहीं, वैल्यू एडेड उत्पादों में अधिक अवसर।कृषि एवं निर्यात विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य का बाजार केवल कच्चे मिलेट अनाज का नहीं, बल्कि उनसे तैयार किए जाने वाले मूल्य संवर्धित उत्पादों का है।

रागी आटा, हेल्थ मिक्स, मिलेट कुकीज, स्नैक्स, ब्रेकफास्ट सीरियल, आर्गेनिक मिलेट उत्पाद और रेडी-टू-ईट फूड की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है ।अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में ग्लूटेन-फ्री और हेल्थ फूड उत्पादों की लोकप्रियता बढ़ने से रागी एवं अन्य मिलेट आधारित खाद्य पदार्थों की मांग मजबूत हुई है।वहीं यूएई सहित खाड़ी देशों में मिलेट स्नैक्स और तैयार खाद्य उत्पादों के लिए तेजी से बाजार विकसित हो रहा है।ब्रांडिंग और गुणवत्ता से खुलेगा बड़ा बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार के किसानों और उद्यमियों को केवल उत्पादन तक सीमित न रहकर ब्रांडिंग, आकर्षक पैकेजिंग और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर भी ध्यान देना होगा।आर्गेनिक प्रमाणन, आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातोन्मुख उत्पाद विकास के माध्यम से बिहार वैश्विक हेल्थ फूड बाजार में मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है।

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