बेगूसराय: महिनाथ स्थान वीरपुर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सोमवार को संपन्न हो गया। अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। कथावाचक गरुणेश जी महाराज ने श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुये स्यमंतक मणि की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि दुनिया स्वार्थी है। सच्चा मित्र केवल आपके माता-पिता और परमात्मा हो सकते हैं। इसलिये परमात्मा को अपना मित्र बनाएं। उन्होंने कहा कि लोगों को अभिमान के बदले स्वाभिमान होना चाहिये। उन्होंने श्रीकृष्ण-सुदामा प्रसंग की चर्चा करते हुये कहा कि सुदामा दरिद्र नहीं थे।
कथावाचक ने उधो जी को ब्रज भेजने, प्रद्युम्न के जन्म व विवाह, राजा नृग को गिरगिट से मुक्ति दिलाने, राजसूय यज्ञ, शिशुपाल वध, दत्तात्रेय व सुदामा की कथा विस्तार से सुनायी। मौके पर पंडित राजगुरु, पूर्व मुखिया पंकज कुमार सिंह व अनिता देवी, उपमुखिया मीनू देवी, सरपंच दयानंद झा, विनोद कुमार, राममूर्ति सिंह, पूरन झा, शिक्षक सर्वेश झा, रंजन कुमार झा, नवीन कुंवर, डॉ राम आह्लाद राय, संजय झा, श्यामनंदन झा आदि मौजूद थे।
