डीएनबी भारत डेस्क
बेगूसराय पुलिस ने एक्साइज कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में सेंध लगाने की बड़ी साजिश का खुलासा करते हुए सेटर गैंग के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास से हाईटेक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का जखीरा बरामद किया है, जिनकी मदद से अभ्यर्थियों तक परीक्षा के दौरान उत्तर पहुंचाने की तैयारी थी।

पुलिस का दावा है कि गिरोह ने कई अभ्यर्थियों से मोटी रकम भी वसूल की थी।14 जून से शुरू होने वाली एक्साइज कांस्टेबल भर्ती परीक्षा से ठीक पहले बेगूसराय पुलिस की टेक्निकल टीम और बखरी थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक बड़े परीक्षा रैकेट का पर्दाफाश किया है। गुप्त सूचना के आधार पर बखरी थाना क्षेत्र के जीतपुर गांव में छापेमारी की गई, जहां भारी मात्रा में परीक्षा में नकल कराने और अवैध संचार के लिए इस्तेमाल होने वाले हाईटेक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने जीतपुर निवासी राजेश रौशन और साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र के बाबूराही गांव निवासी दुलारचंद कुमार को गिरफ्तार किया।पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि 14 जून को होने वाली एक्साइज कांस्टेबल परीक्षा में अभ्यर्थियों तक आंसर-की पहुंचाने की योजना थी और इसके लिए परीक्षार्थियों से मोटी रकम ली गई थी।पुलिस ने मौके से 38 वॉकी-टॉकी, 7 ब्लूटूथ डिवाइस, 6 चार्जर, 3 जोड़ी विशेष इलेक्ट्रॉनिक बनियान, 3 जोड़ी इलेक्ट्रॉनिक चप्पल, 2 माइक, एक मेटल डिटेक्टर, 2 मोबाइल फोन, 2 एटीएम कार्ड और कई अभ्यर्थियों के मूल प्रमाण पत्र बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक चप्पल और बनियान जैसे उपकरण यह दर्शाते हैं कि आरोपी आधुनिक तकनीक के जरिए परीक्षा प्रणाली को धता बताने की तैयारी में थे।बरामद अभ्यर्थियों के मूल प्रमाण पत्रों से यह भी संकेत मिला है कि कई परीक्षार्थी इस गिरोह के संपर्क में थे और कथित तौर पर डील के तहत अपने दस्तावेज गिरोह के पास जमा कराए गए थे। फिलहाल बखरी डीएसपी के नेतृत्व में पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है और गिरोह से जुड़े अन्य सेटरों, दलालों तथा लाभार्थी अभ्यर्थियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।
केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) द्वारा 14 जून से 24 जून तक बिहार के 38 जिलों में एक्साइज कांस्टेबल, वॉर्डन और मोबाइल स्क्वाड कांस्टेबल के 4,236 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की जानी है। ऐसे में परीक्षा से पहले इस बड़े रैकेट का खुलासा पुलिस के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। अब जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क से कितने अभ्यर्थी और कितने अन्य सेटर जुड़े हुए हैं।
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