डीएनबी भारत डेस्क
भले ही केंद्र और राज्य की सरकारें कहती हो कि हमारे शासनकाल में सब का साथ मिला तो हमने सब का विकास किया है। लेकिन यह अश्लोगन वीरपुर से पकठौल जाने वाली सड़क हो या फिर वीरपुर पीएचसी से वीरपुर जाने वाली सड़क हो या फिर वीरपुर से बथौली ढाला जाने वाली सड़क हो सभी के सभी सांसदों, विधायकों, जिला पार्षदों, पदाधिकारियों के अपने अपने हिसाब अपने अपने कानून, अपने अपने आदेश के कारण बद से बद्तर होते होते अब हल्की सी भी बारीस होने पर किचर यूक्त झील में तब्दील हो जाया करती है।

उक्त सरक पर कहीं एक फिट तो कहीं दो फिट से भी अधिक जल जमाव रहने से आए दिन साइकिल सबार टेम्पो, ई-रिक्शा, बाइक सवार तो गिरते ही हैं साथ में स्थानीय लोग और ग्रामीणों के द्वारा सहानुभूति या मदद के बदले वैसे लोगों को चिढ़ाने के लिए मजाक और ठहाका लगा कर चिढ़ाते भी हैं।
इस संबंध में वीरपुर बाजार के दर्जनों दुकानदारों ने बताया कि पदाधिकारियों सांसदों, विधायकों, जिला पार्षदों को हस्ताक्षर युक्त आवेदन देते देते थक गए हैं। कोई सुनता हीं नहीं है।
दुकानदारों ने यह भी बताया कि पूर्व जिला धिकारी तुषार सिंगला, विधायक कुंदन कुमार सिंह के द्वारा जनसंवाद कार्यक्रम के बाद लगातार स्थल निरीक्षण संबंधित विभाग के पदाधिकारियों के द्वारा समस्या समाधान करने से संबंधित सर्वे भी किया गया था। उद्घाटन भी हुआ वोर्ड भी लगे लेकिन योजना धरातल पर नहीं दिखती है।जल जमाव की समस्या अब भी जस की तस बना हुआ हीं है।
डीएनबी भारत डेस्क