डीएनबी भारत डेस्क
भगवानपुर। राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की उपस्थिति अब पहली घंटी में ही अनिवार्य रूप से दर्ज करनी होगी। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि बच्चों की दर्ज उपस्थिति के आधार पर ही विद्यालयों में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) तैयार किया जाएगा। यदि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस संबंध में एमडीएम निदेशक ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ, एमडीएम) को पत्र भेजकर सख्त निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि यदि पहली घंटी के बाद बच्चों की उपस्थिति दर्ज की जाती है, तो इसे फर्जी उपस्थिति माना जाएगा और यह सीधे तौर पर अनियमितता की श्रेणी में आएगा।
निदेशक ने यह भी बताया कि मध्याह्न भोजन योजना के तहत निर्धारित मेन्यू का पालन नहीं किया जा रहा है, जो गंभीर चिंता का विषय है। नियम के अनुसार शुक्रवार या रविवार को बच्चों को अंडा या फल देना अनिवार्य है, लेकिन जांच में पाया गया कि कई विद्यालयों में बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। इसे विभाग ने खेदजनक बताया है।
हाल ही में एमडीएम निदेशक द्वारा सारण और औरंगाबाद जिले के विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान कई खामियां सामने आईं। अधिकतर विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति पहली घंटी में पंजी में दर्ज नहीं की गई थी। इसके अलावा मेन्यू के अनुसार हरी सब्जियों को भोजन में शामिल नहीं किया जा रहा था और रसोईघर की साफ-सफाई भी संतोषजनक नहीं पाई गई।
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन खामियों से यह साबित होता है कि विद्यालयों में नियमित रूप से निरीक्षण नहीं हो रहा है। विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे समय-समय पर विद्यालयों का निरीक्षण सुनिश्चित करें और मध्याह्न भोजन योजना को सही तरीके से लागू करें, ताकि बच्चों को निर्धारित पोषण मिल सके।
शिक्षा विभाग के इस सख्त रुख के बाद अब विद्यालयों में लापरवाही बरतने वाले कर्मियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
बेगूसराय भगवानपुर संवाददाता गणेश प्रसाद की रिपोर्ट