बेगूसराय में अब 15 मिनट में दूर होगी गर्भवती महिलाओं में खून की कमी, FCM इंजेक्शन की शुरुआत

DNB Bharat Desk

बेगूसराय में गर्भवती महिलाओं को एनीमिया यानी खून की कमी से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ी और राहत भरी पहल की है।अब जिले के सरकारी अस्पतालों में ‘फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज’ यानी FCM इंजेक्शन के जरिए मात्र 15 से 20 मिनट की ड्रिप में ही शरीर में आयरन की कमी को तेजी से पूरा किया जा रहा है।स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे द्वारा पटना से इस योजना का राज्यव्यापी उद्घाटन किए जाने के बाद बेगूसराय सदर अस्पताल में भी इस सेवा की शुरुआत कर दी गई है।

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पहले ही दिन डॉक्टरों की निगरानी में 20 एनीमिक गर्भवती महिलाओं को यह इंजेक्शन दिया गया।विशेषज्ञों के अनुसार, FCM एक आधुनिक तकनीक है, जो सीधे रक्तप्रवाह में आयरन पहुंचाकर हीमोग्लोबिन के स्तर को तेजी से बढ़ाती है। इससे महिलाओं को महीनों तक आयरन की गोलियां खाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और प्रसव के समय होने वाली जटिलताओं का खतरा भी कम होगा।सदर अस्पताल में इस सुविधा के लिए 20 बेड का एक समर्पित वार्ड तैयार किया गया है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, इंजेक्शन देने के बाद मरीजों को 30 मिनट तक विशेषज्ञों की निगरानी में रखा जाता है और आपात स्थिति के लिए पूरी व्यवस्था की गई है।

बेगूसराय में अब 15 मिनट में दूर होगी गर्भवती महिलाओं में खून की कमी, FCM इंजेक्शन की शुरुआत 2सिविल सर्जन डॉक्टर अशोक कुमार ने सभी चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि दूसरी और तीसरी तिमाही की उन गर्भवती महिलाओं को चिन्हित किया जाए, जिनका हीमोग्लोबिन 7 से 9.9 ग्राम प्रति डेसीलीटर के बीच है, ताकि उन्हें समय पर यह उपचार मिल सके।वहीं पिरामल फाउंडेशन इस अभियान को सफल बनाने के लिए गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रहा है। फाउंडेशन के प्रतिनिधियों का कहना है कि परिवारों को समझाया जा रहा है ताकि महिलाएं इलाज से डरें नहीं और समय पर जांच कराएं

बेगूसराय में अब 15 मिनट में दूर होगी गर्भवती महिलाओं में खून की कमी, FCM इंजेक्शन की शुरुआत 3स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य इस पहल को जनआंदोलन का रूप देकर ‘एनीमिया मुक्त बेगूसराय’ बनाना है। इसके लिए टीकाकरण, प्रसव पूर्व जांच और सामुदायिक स्तर पर जागरूकता अभियान को भी तेज किया गया है।बेगूसराय में एनीमिया के खिलाफ शुरू की गई यह पहल मातृ स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है। अगर यह योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो न सिर्फ मातृ मृत्यु दर में कमी आएगी, बल्कि गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव का भी बेहतर अवसर मिलेगा।

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