होती है हर मन्नत पूरी, बडगांव छठघाट की है प्राचीन परम्परा और इतिहास।
डीएनबी भारत डेस्क
छठ महापर्व के दूसरे दिन व्रतियों ने दूसरे दिन खरना में खीर का मीठा और चावल दाल का प्रसाद बनाकर भगवान भास्कर को भोग लगाने के बाद स्वयं प्रसाद ग्रहण कर अपने परिवार और मित्रों को प्रसाद ग्रहण कराया । इसके बाद 24 घंटे का निर्जला प्रसाद रखा ।

सबसे ज्यादा भीड़ नालंदा के बड़ागांव और औंगांरी धाम में देखने को मिला जहां 4 दिनों तक प्रवास कर छठव्रती भगवान सूर्य की आराधना करते हैं । बडगांव की मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण के पौत्र राजा शाम्य को कुष्ठ रोग हो गया था । उन्होंने इसी बड़गांव तालाब में स्नान कर भगवान सूर्य की आराधना किए थे जिससे वो कुष्ट रोग से मुक्त हो गए थे ।
तब से अब तक बिहार ही नहीं झारखंड , बंगाल, उड़ीसा, दिल्ली यूपी समेत अन्य जगहों से लोग यहां 4 दिनों तक प्रवास कर पूजा अर्चना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां पर्व करने से उनकी हर मन्नत पूरी होती है। छठ पर्व को लेकर जिला प्रशासन द्वारा भी समुचित व्यवस्था नहीं किए जाने से छठवर्ती नाराज दिखे।
किसी भी आपात से निपटने के लिए एसडीआरएफ की टीम और वोट की व्यवस्था की गई है । दूर दराज से आने वाले व्रतियों की सुविधा के लिए कही कही पंडाल की व्यवस्था की गई है। सीसीटीवी से इलाके में विशेष नजर बनाई जा रही है।
डीएनबी भारत डेस्क