नालंदा में खास परंपरा: सऊदी के चांद पर तय होती है ईद की तारीख, चांद दिखते ही जश्न, नालंदा के बड़ाकर समेत कई गांवों में पहले ही मन गई ईद

DNB Bharat Desk

जहां देश के अधिकांश हिस्सों में अभी ईद के चांद का इंतजार जारी है, वहीं नालंदा जिले के सिलाव प्रखंड के बड़ाकर समेत कई गांवों में शुक्रवार को ही ईद-उल-फितर का पर्व पूरे जोश, उल्लास और अकीदत के साथ मनाया गया।गुरुवार की शाम जैसे ही इन गांवों में चांद का दीदार हुआ, वैसे ही ईद के जश्न की शुरुआत हो गई।

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शुक्रवार की सुबह लोग नए और पाक-साफ लिबास पहनकर मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज अदा करने पहुंचे। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी और मुल्क में अमन, तरक्की और भाईचारे की दुआ मांगी।इन गांवों में देश से एक दिन पहले ईद मनाने के पीछे एक खास वजह है यहां का गहरा “सऊदी कनेक्शन”। बड़ाकर और आसपास के गांवों के बड़ी संख्या में लोग सऊदी अरब में रहकर रोजगार करते हैं।

नालंदा में खास परंपरा: सऊदी के चांद पर तय होती है ईद की तारीख, चांद दिखते ही जश्न, नालंदा के बड़ाकर समेत कई गांवों में पहले ही मन गई ईद 2वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत वहां चांद दिखने के आधार पर ही ये लोग अपने गांव में भी ईद मनाते हैं।गुरुवार शाम जब सऊदी अरब के अनुसार चांद नजर आया, तो यहां के लोगों ने भी उसी परंपरा को निभाते हुए शुक्रवार को ईद मनाने का फैसला लिया। ग्रामीणों का कहना है कि उनके लिए त्योहार सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि सात समंदर पार बसे अपनों की भावनाओं और परंपराओं से जुड़ाव का प्रतीक है।

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