डीएनबी भारत डेस्क
समस्तीपुर:बंदे को हर बुराई से दूर रखकर अल्लाह के नजदीक लाने का मौका देने वाले पाक महीने रमजान की रूहानी चमक से दुनिया एक बार फिर रोशन हो चुकी है और फिजा में घुलती अजान और दुआओं में उठते लाखों हाथ खुदा से मुहब्बत के जज्बे को शिद्दत दे रहे हैं।

वारिसनगर विधानसभा छेत्र के मथुरापुर निवासी युवा समाजसेवी जमशेद आदिल सोनू ने बताया कि दौड़-भाग और खुदगर्जी भरी जिंदगी के बीच इंसान को अपने अंदर झांकने और खुद को अल्लाह की राह पर ले जाने की प्रेरणा देने वाले रमजान माह में भूख-प्यास समेत तमाम शारीरिक इच्छाओं व झूठ बोलने, चुगली करने, खुदगर्जी, बुरी नजर डालने जैसी सभी बुराइयों पर लगाम लगाने की मुश्किल कवायद रोजेदार को अल्लाह के बेहद करीब पहुंचा देती है.
उन्होंने बताया कि इस माह में रोजेदार अल्लाह के नजदीक आने की कोशिश के लिए भूख-प्यास समेत तमाम इच्छाओं को रोकता है. बदले में अल्लाह अपने उस इबादत गुजार रोजेदार बंदे के बेहद करीब आकर उसे अपनी रहमतों और बरकतों से नवाजता है. इस्लाम की पांच बुनियादों में रोजा भी शामिल हैं. इस पर अमल के लिए ही अल्लाह ने रमजान का महीना मुकर्रर किया है.
खुद अल्लाह ने कुरान शरीफ में इस महीने का जिक्र किया है. अमूमन 30 दिनों के रमजान माह को तीन अशरों में बांटा गया है. पहला अशरा ‘रहमत’ का है. इसमें अल्लाह अपने बंदों पर रहमत की दौलत लुटाता है. दूसरा अशरा ‘बरकत’ का है जिसमें खुदा बरकत नाजिल करता है जबकि तीसरा अशरा ‘मगफिरत’ का है. इस अशरे में अल्लाह अपने बंदों को गुनाहों से पाक कर देता है.
समस्तीपुर संवाददाता अफरोज आलम की रिपोर्ट