डीएनबी भारत डेस्क
नालंदा/दस केंद्रीय श्रमिक संगठनों के आह्वान पर गुरुवार को चार श्रम कोड के विरोध में बुलाए गए एक दिवसीय देशव्यापी आम हड़ताल का असर बिहार शरीफ में देखने को मिला। बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ की शाखा ने कामकाज ठप कर सड़कों पर उतरकर केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाए और चारों श्रम कोड को मजदूर विरोधी बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की। कर्मचारियों का कहना था कि ये श्रम कोड श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करने और उन्हें पूंजीपतियों के हाथों सौंपने की साजिश है। नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार पूंजीपतियों के हित में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि नए श्रम कानूनों के जरिए मजदूरों का शोषण बढ़ेगा और उन्हें गुलाम बनाने की कोशिश की जा रही है।

“हम एक दिन की हड़ताल के जरिए सरकार को चेतावनी दे रहे हैं। यदि चारों श्रम कोड वापस नहीं लिए गए तो श्रमिक संगठन अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे,” नेताओं ने ऐलान किया। मजदूरों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने मांग रखी कि चारों श्रम कोड को तुरंत निरस्त किया जाए, ठेका प्रथा और देनदारी व्यवस्था खत्म की जाए, सभी कर्मियों का सरकारीकरण किया जाए तथा न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह लागू किया जाए।
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