कहा हमारी पहचान सोने चांदी से नहीं है.
डीएनबी भारत डेस्क
बिहार राज्य स्वर्ण व्यवसायी संघ के आह्वान पर राज्य के कई जिलों में स्वर्ण आभूषण दुकानों में बुर्का, हिजाब, घूंघट या हेलमेट पहनकर प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले का असर नालंदा जिले में भी देखने को मिल रहा है। हालांकि नालंदा में अभी तक दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठानों पर इस संबंध में कोई नोटिस नहीं चस्पाया है, लेकिन स्थानीय स्वर्ण व्यवसायियों ने संघ के इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसके समर्थन में खड़े होने की बात कही है।

स्वर्ण व्यवसायियों का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। दुकानदारों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति चेहरा ढककर दुकान में प्रवेश करता है और चोरी या लूट जैसी घटना होती है, तो उसकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। आए दिन सर्राफा दुकानों में चोरी और लूट की घटनाएं सामने आती रहती हैं, ऐसे में यह कदम व्यवसायियों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।इस फैसले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। भाजपा विधायक डॉक्टर सुनील ने स्वर्ण व्यवसायी संघ के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि इस तरह के मामलों में विपक्ष हमेशा विरोध करता है।
उन्होंने कहा कि ज्वेलरी दुकानों में बुर्का, घूंघट या हेलमेट पहनकर अपराध होने की स्थिति में अपराधियों की पहचान करना कठिन हो जाता है। यह फैसला जनहित और सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है ताकि ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके। वहीं, पूर्व विधायक पप्पू खान ने इस फैसले पर संतुलित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश की सुरक्षा बेहद जरूरी है, लेकिन इस तरह के फैसलों को जबरदस्ती लागू नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर धर्म और संस्था के अपने सिद्धांत और नियम होते हैं। सर्राफा व्यवसायी अपनी सुरक्षा के लिहाज से सही हैं, वहीं धार्मिक रूप से समाज के अपने नियम भी हैं। ऐसे में दोनों पक्षों को आपसी समझ और लचीलापन दिखाना होगा, ताकि धर्म भी सुरक्षित रहे और देश की सुरक्षा भी बनी रहे।
इस फैसले को लेकर नालंदा की मुस्लिम महिलाओं में नाराजगी देखने को मिली। मुस्लिम महिलाओं ने साफ शब्दों में कहा कि वे सोने-चांदी के आभूषण न भी पहनें, लेकिन बुर्का या हिजाब किसी भी हाल में नहीं उतारेंगी। उनका कहना है कि उनकी पहचान सोने-चांदी से नहीं, बल्कि उनके इस्लाम धर्म से है। इस्लाम उन्हें बुर्का या हिजाब उतारने की अनुमति नहीं देता। मुस्लिम महिलाओं ने इस फैसले को अनुचित बताते हुए कहा कि बुर्का नहीं पहनने से अपराध पर अंकुश लगेगा, यह तर्क सही नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे बुर्का पहनकर ही दुकानों में खरीदारी करने जाएंगी।
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