शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस सिद्धार्थ ने समस्तीपुर जिले के उत्क्रमित मध्य विधालय लगुनियाँ सूर्यकण्ठ स्कूल के प्रधानाध्यापक से वीडियो कॉल पर किया संवाद

DNB Bharat Desk

समस्तीपुर: बिहार में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस सिद्धार्थ ने शिक्षकों से संवाद की नई पहल की है। उन्होंने समस्तीपुर जिले के उत्क्रमित मध्य विधालय लगुनियाँ सूर्यकण्ठ स्कूल के प्रधानाध्यापक सौरभ कुमार से वीडियो कॉल पर बातचीत की। साथ ही स्कूल में संचालित होने बाले बाल संसद के बच्चों से भी बातचीत की। वीडियो कॉल पर बातचीत के दौरान बाल संसद के बच्चों स्कूल ड्रेस कोड में स्वेटर को शामिल करने की बात रखी।

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शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस सिद्धार्थ ने समस्तीपुर जिले के उत्क्रमित मध्य विधालय लगुनियाँ सूर्यकण्ठ स्कूल के प्रधानाध्यापक से वीडियो कॉल पर किया संवाद 2प्रधानाध्यापक सौरभ कुमार ने बताया कि एसीएस अपने खास कार्यक्रम ‘चलो शिक्षा की बात करते हैं’ के जरिये बच्चों के द्वारा भेजे गए मेल और पत्रों को संज्ञान में लेते हैं। उसी कार्यक्रम के तहत बच्चों ने उन्हें एक मेल किया था। इस संदर्भ में उन्होंने वीडियो कॉल किया था। जिसमें आठवीं वर्ग के तीन छात्रोंओ से बातचीत की। बच्चों ने ड्रेस कोड की समस्या के बारे में बताया और उनसे ठंड के मौसम में एक रंग के स्वेटर को ड्रेस कोड में शामिल करने की मांग रखी। वर्ग में बाल संसद के बच्चों ने अपने पदों का लगा टोकन ऑफ ऑनर पहन रखा था जिसकों लेकर उनसे जानकारी ली।

शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस सिद्धार्थ ने समस्तीपुर जिले के उत्क्रमित मध्य विधालय लगुनियाँ सूर्यकण्ठ स्कूल के प्रधानाध्यापक से वीडियो कॉल पर किया संवाद 3एसीएस से वीडियो कॉल पर हुई बातचीत से बच्चे काफी उत्साहित थे। बच्चों ने बताया कि एसीएस सर ने हमलोगों से बात की, हमें काफी अच्छा लगा। बच्चों ने स्कूल में ड्रेस कोड को लेकर अपनी बात रखी। बता दें कि यह पहली बार था जब एसीएस ने समस्तीपुर जिले के किसी विद्यालय के शिक्षक और बच्चों से संवाद किया। डॉ. एस सिद्धार्थ ने सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्य को निर्देशित किया है कि उनके विभागीय मोबाइल नंबर से प्रतिदिन विद्यालय अवधि के दौरान प्रदेश के किन्हीं 10 विद्यालयों के शिक्षकों को फोन जाएगा। फोन वीडियो कॉल के रूप में जाएगा और इस वीडियो कॉल को उठाना अनिवार्य है। इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों को प्रोत्साहित करना और शिक्षा क्षेत्र में उनके नवाचारों को पहचान देना है।

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