सुंदरकांड का हिंदू धर्म में अत्यधिक आध्यात्मिक, मानसिक और धार्मिक महत्व माना जाता है।
डीएनबी भारत डेस्क
श्रीरामचरितमानस का पांचवां अध्याय सुंदरकांड गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित है, और हिंदू धर्म में इसका अत्यधिक आध्यात्मिक, मानसिक और धार्मिक महत्व माना जाता है। पूरे रामचरितमानस में यह एकमात्र ऐसा अध्याय है जो भगवान श्रीराम के गुणों के बजाय उनके परम भक्त श्री हनुमान जी की विजय, उनके पराक्रम, बुद्धि, और भक्ति की गाथा पर आधारित है।

उक्त बातें मंगलवार को पतित पावन सिमरिया धाम में अखिल भारतीय चतुर्भुजी खालसा संत साहेब राम शिविर में परम पूज्य संत मौनी बाबा के सानिध्य एवं व्यवस्थापक गोपाल दास जी महाराज के अगुवाई में दरभंगा जिले में विष्णपुर क्षेत्र अंतर्गत मोरोगांव निवासी कृष्ण कुमार चौधरी द्वारा आयोजित सुंदरकांड पाठ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यास संत राम दस जी ने कहा । वहीं उप व्यास राम टहल दास जी ने कहा सुंदरकांड का पाठ करने से व्यक्ति सीधे हनुमान जी के सानिध्य और उनकी कृपा का अनुभव करता है। इस सुंदर कांड पाठ में योगा दास जी, सिद्धांत दास जी, गणपति दास जी सहित 111 साधु संतों ने पाठ किया।
साथ ही सैकड़ो श्रोता भगवान ने सुंदरकांड पाठ का श्रवण कर लाभ उठाया। वहीं व्यवस्थापक गोपाल दास जी महाराज ने सुंदरकांड के पाठ पर प्रकाश डालते हुए कहा की सुंदरकांड के पाठ करने एवं सांत चित हो कर श्रवण मात्र करने से प्राणियों को संकटों से मुक्ती मिलता है, आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति में वृद्धि होता है, मानसिक शांति और ऊर्जा प्राप्त होता है। नाना प्रकार के गृहक्लेश दुर होता है तथा पारिवारिक सुख मिलता है।साथ ही गृहदोष का निवारण हो जाता है। ऐसा ही लाभ वो मनोवांछित फल के प्राप्ती परमपूज्य गुरुदेव परम संत मौनी बाबा के सानिध्य में दरभंगा जिले के मोरोगांव निवासी कृष्ण कुमार चौधरी जी को प्राप्त हुआ।
बेगूसराय बीहट संवाददाता धरमवीर कुमार की रिपोर्ट