जीडी कॉलेज बेगूसराय में दिनकर जयंती पर राष्ट्रीय संगोष्ठी: वक्ताओं ने कहा- तुलसी के बाद विश्व फलक पर दिनकर का कद सबसे बड़ा

DNB Bharat Desk

बेगूसराय/बीहट-गणेश दत्त महाविद्यालय (जीडी कॉलेज), बेगूसराय में बुधवार को राष्ट्रकवि दिनकर जयंती के अवसर पर ‘विश्व साहित्य में दिनकर’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में प्रबुद्ध जनों, शिक्षाविदों और छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता गणेश दत्त महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो भूपेंद्र नारायण ने कहा दिनकर की जयंती पर उन्हें नमन करता हूँ दिनकर ओज और जवानी के कवि थे। उनकी कविताओं से हिंदी भाषा समृद्ध हुई है।

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय वर्धा के पूर्व कुलपति एवं हिंदी विभागाध्यक्ष अध्यक्ष  कृष्ण कुमार सिंह थे, जिन्होंने विश्व साहित्य के पटल पर दिनकर जी के साहित्यिक अवदानों और उनकी प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा ” जो भी रचनाकार अपने समय से संवाद करेगा और वैश्विक चिंतन करेगा उसका साहित्य वैश्विक साहित्य है। तुलसी के बाद हिंदी कवियों में दिनकर को आप दुनियां के बड़े साहित्यकारों में गिन सकते हैं। दिनकर पर विवेकानंद, टैगोर, इलियट, दास्तोवस्की का गहरा प्रभाव है।राजकीय डिग्री कॉलेज के प्राचार्य प्रो अंजनी कुमार ने कहा दिनकर जी केवल शब्दों के जादूगर नहीं थे, बल्कि वे देश की राष्ट्रीय चेतना और क्रांति के सच्चे शंखनाद थे।

जीडी कॉलेज बेगूसराय में दिनकर जयंती पर राष्ट्रीय संगोष्ठी: वक्ताओं ने कहा- तुलसी के बाद विश्व फलक पर दिनकर का कद सबसे बड़ा 2बर्सर सह हिंदी प्राध्यापक डॉ. प्रियांशु ने कहा दिनकर जी की रचनाओं में ‘वीर रस’ की ऐसी गूंज थी कि संसद से लेकर सड़क तक उनके शब्द गूंजते थे।इसके साथ ही  डॉ अभिषेक कुंदन ने कहा कि दिनकर की विश्व दृष्टि को निर्मित करने में अंतरराष्ट्रीय साहित्य और साहित्यकारों की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय साहित्यकारों से दिनकर की तुलना करते हुए कहा कि उनके युद्धोत्तर काव्य पर रसेल और इलियट का प्रभाव रहा है वहीं उर्वशी जैसे काव्य पर डी एच लॉरेंस और चार्ल्स किंजी का।रामचरित्र सिंह महाविद्यालय हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ कृष्ण कुमार पासवान ने भी बतौर वक्ता अपने विचार साझा करते हुए कहा दुनिया में प्रेम के बाद सबसे महत्वपूर्ण कविता शांति पर लिखी गई है। यह संयोग की बात है की दिनकर प्रेम और शांति के कवि हैं।

इन्होंने रसवंती और उर्वशी में जहाँ प्रेम के चरम की अभिव्यक्ति दी है वही कुरुक्षेत्र के माध्यम से शांति का सन्देश पुरे विश्व को दिया है। 1950 में संविधान लागू होने के बाद रश्मिरथी में कर्ण के माध्यम से इन्होंने सामाज के यथार्थ को अभिव्यक्ति दी है।कार्यक्रम की शुरुआत में संस्कृति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष और सहायक प्रोफेसर डॉ अरमान आनंद ने कहा कुरुक्षेत्र को  लियो टॉलस्टॉय के वार एंड पीस के सामने और रश्मिरथी को विक्टर ह्यूगो की रचनाओं के साथ रख कर देखा जा सकता है। उर्वशी को पढ़ते हुए फ्रायड को तो याद किया ही जाता है वही जर्मनी के लेखक जोहान वोल्फ गेटे  की रचना फाउस्ट की याद आती है जिसमें पुरुरवा  की तरफ फाउस्ट भी हेलेन की ओर आकर्षित है और रचना कामध्यात्म के विचार को पुष्ट करती है। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ कुंदन कुमार द्वारा किया गया।

जीडी कॉलेज बेगूसराय में दिनकर जयंती पर राष्ट्रीय संगोष्ठी: वक्ताओं ने कहा- तुलसी के बाद विश्व फलक पर दिनकर का कद सबसे बड़ा 3संगोष्ठी के समापन पर हिंदी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ श्रवसुमी कुमारी ने उपस्थित सभी अतिथियों, वक्ताओं और शिक्षार्थियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस भव्य राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन हिंदी विभाग एवं गणेश दत्त महाविद्यालय के समस्त परिवार के सहयोग से संपन्न हुआ, जिसके संयोजक डॉ अरमान आनंद थे। संगोष्ठी में वक्ताओं के ओजस्वी विचारों को सुनने के लिए सभागार में भारी उत्साह देखा गया। इस अवसर पर प्रो जिक्रुल्लाह खान, प्रो कृष्ण कुमार, प्रो संतोष कुमार , डॉ अनुप्रिया राय, डॉ शिवानी कुमारी, डॉ अभिमन्यु प्रसाद,  डॉ अमरदीप कुमार आदि उपस्थित थे।

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