राष्ट्रकवि दिनकर की 118वीं जयंती: सिमरिया में गूंजीं कालजयी कविताएं, वक्ताओं ने कहा- ‘दिनकर का साहित्य जीवन को नई ऊंचाई देता है’

DNB Bharat Desk

सिमरिया: दिनकर स्मृति विकास समिति, सिमरिया के तत्वावधान में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 118वीं जयंती समारोह के आठवें दिन रविवार को विवेकानंद कोचिंग संस्थान में एक भव्य साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। समारोह में छात्र-छात्राओं ने दिनकर की ओजस्वी रचनाओं का पाठ कर समां बांध दिया, वहीं वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दिनकर पुस्तकालय के अध्यक्ष विश्वंभर सिंह ने कहा, “सिमरिया राष्ट्रकवि दिनकर को हमेशा पूरी श्रद्धा के साथ याद करता रहा है और इसका वास्तविक मूल्यांकन आने वाला समय करेगा। दिनकर की रचनाएं कालजयी हैं, जो हर पीढ़ी का मार्गदर्शन करती रहेंगी।”

राष्ट्रकवि दिनकर की 118वीं जयंती: सिमरिया में गूंजीं कालजयी कविताएं, वक्ताओं ने कहा- 'दिनकर का साहित्य जीवन को नई ऊंचाई देता है' 2‘दिनकर अपनी कृतियों से देवता बन गए’ समारोह के मुख्य वक्ता लोकगायक सच्चिदानंद पाठक ने कहा कि दिनकर एक साधारण मनुष्य के रूप में जन्मे, लेकिन अपनी अमर कृतियों के बल पर देवतुल्य हो गए। बच्चों में दिनकर का स्वरूप और उनके विचार साफ झलकते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि दिनकर के साहित्य और विचारों की उपेक्षा करने वाला व्यक्ति वैचारिक रूप से मृतक समान है।

साहित्यकार एस. मनोज ने विचार रखते हुए कहा कि दिनकर हम सभी के लिए प्रेरणा के अक्षय स्रोत हैं। जिसने भी उनके विचारों को आत्मसात किया, उसने जीवन में नई ऊंचाइयों को छुआ। वहीं, वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण प्रियदर्शी ने कहा कि आज के विद्यार्थियों को दिनकर की कविताओं को गहराई से समझने की आवश्यकता है; उनके साहित्य का अध्ययन युवाओं के बौद्धिक विकास और करियर निर्माण में बेहद मददगार साबित होगा।

छात्रों ने किया ओजस्वी काव्यपाठ समारोह के दौरान छात्र-छात्राओं ने दिनकर की लोकप्रिय कविताओं का सस्वर पाठ किया। छात्र अमन कुमार ने प्रसिद्ध खंडकाव्य ‘रश्मिरथी के तीसरे सर्ग “वर्षों तक वन में घूम-घूम…” का ओजपूर्ण पाठ कर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अतिरिक्त अभय कुमार, आर्यन, पुष्पम भारद्वाज, लक्ष्मी कुमारी, आदर्श कुमार सहित दर्जनों बच्चों ने राष्ट्रकवि की रचनाओं का प्रभावी पाठ किया।

इस अवसर पर राजेश कुमार सिंह, दीनबंधु कुमार, अजीत कुमार, अमन गौतम, प्रियव्रत कुमार, श्यामनंदन निशाकर, संजीव फिरोज, रामकुमार और मनीष कुमार सहित कई गणमान्य लोगों ने भी दिनकर के विचारों पर अपनी बात रखी।

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