डीएनबी भारत डेस्क
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की 118वीं जयंती के अवसर पर आयोजित 12 दिवसीय जयंती समारोह के दूसरे दिन सोमवार को दिनकर आवास, सिमरिया में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। राष्ट्रकवि दिनकर स्मृति विकास समिति, सिमरिया के द्वारा आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता दिनकर पुस्तकालय के अध्यक्ष विश्वम्भर सिंह ने की।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता जनवादी लेखक संघ के प्रदेश सचिव कुमार विनीताभ ने कहा कि आज हिंदी दिवस है और दिनकर जी ने भारत की राष्ट्रीय एकता के लिए हिंदी भाषा को महत्वपूर्ण सूत्र बताया था। दिनकर समतामूलक समाज के सबसे बड़े गायक कवि थे। इस बेगूसराय परिक्षेत्र में हिंदी के सबसे बड़े कवि दिनकर हैं। उनकी दृष्टि प्रगतिशील थी। उनकी रचना ‘रश्मिरथी’ आधुनिक भारत के लिए एक आदर्श ग्रंथ है।
बीएचयू में हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ. रामाज्ञा शशिधर ने कहा कि दिनकर ने भारत सरकार के हिंदी सलाहकार के रूप में हिंदी के विकास में अहम योगदान दिया। दिनकर नई संस्कृति के निर्माता थे। बड़ा लेखक नई संस्कृति का नया फूल खिलाता है, दिनकर ऐसे ही बड़े लेखक थे। उनकी रचनाओं में केवल स्मृति ही नहीं, बल्कि स्वप्न और कल्पना भी है।
उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से आचरण की संस्कृति से विचार की संस्कृति की ओर बढ़ने की राह दिखाई है। दिनकर पुस्तकालय के पूर्व अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने कहा कि सिमरिया और आसपास के बच्चे जब दिनकर की कविता धारा प्रवाह सुनाते हैं, तब इस आयोजन की सार्थकता सिद्ध होती है। शिक्षक अमर कुमार मुरारी और जितेंद्र झा ने भी अपने विचार रखे।
इस अवसर पर रीति कश्यप, आर्यन कुमार और अमन कुमार ने दिनकर की रचनाओं का पाठ किया। स्वागत भाषण संजीव फिरोज ने दिया, जबकि मंच संचालन दिनकर स्मृति विकास समिति के संयुक्त सचिव विनोद बिहारी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन दीनबंधु कुमार ने प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया, तत्पश्चात राष्ट्रकवि दिनकर के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।
मौके पर रंगकर्मी राधे कुमार, वार्ड सदस्य सूरज कुमार, अजीत कुमार, कुंदन कुमार मिश्रा, मंजुला कुमारी सहित कई साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।
बेगूसराय सिमरिया से कृष्ण मुरारी की रिपोर्ट