डीएनबी भारत डेस्क
मुंबई की तर्ज पर नालंदा के बिहारशरीफ में भी गणपति बप्पा का उत्सव पूरे धूमधाम और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। सोमवार की देर रात शहर के अलग-अलग पूजा पंडालों में ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के बीच भगवान गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना की गई।
इस दौरान पूरा शहर ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों से गूंज उठा। खास बात यह है कि वर्ष 2026 में हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का संयोग 14 सितंबर को एक ही दिन बना है, जिसे श्रद्धालु बेहद खास मान रहे हैं। बिहारशरीफ में गणेश पूजनोत्सव की परंपरा करीब 1932 से चली आ रही है। शहर के गोला गणेश और बुढ़वा गणेश की अपनी अलग धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान है।
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ताया जाता है कि सोहसराय इलाके में कभी आलू-प्याज की बड़ी मंडी हुआ करती थी। यहां के व्यापारी कारोबार के सिलसिले में मुंबई जाते थे, जहां भव्य गणेशोत्सव देखकर उन्होंने बिहारशरीफ में भी इसकी शुरुआत की,1932 से यही परंपरा लगातार भव्य होती जा रही है। बिहारशरीफ में गणेश पूजनोत्सव करीब 14 दिनों तक चलता है और शहर के चौक-चौराहों पर जगह-जगह आकर्षक पंडालों में बप्पा विराजमान हो चुके हैं।
वहीं, पूजा को लेकर सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सभी प्रमुख पूजा पंडालों और चौक-चौराहों पर पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
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