पीएचडी विभाग बेखबर, ढाई महीने से झेल रहे पानी की किल्लत का दंश
डीएनबी भारत डेस्क

हरनौत प्रखंड के बराह पंचायत के टाडापर गांव के वार्ड संख्या एक में करीब ढाई महीने से हर घर नल-जल योजना बंद है। मोटर खराब होने से लगभग 300 घरों की 1200 से अधिक आबादी पेयजल संकट से जूझ रही है।
भीषण गर्मी और उमस में ग्रामीणों को दूर जाकर पानी लाना पड़ता है नल जल योजना का लाभ नहीं मिलने से ग्रामीणों का दिनचर्या में भी परेशानी हो रही है। समस्या की शिकायत कई बार संबंधित विभाग के अधिकारियों से की गई, लेकिन समय पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।ग्रामीणों ने बताया कि शिकायत के करीब एक महीने बाद मिस्त्री को भेजा गया था। मिस्त्री द्वारा पंप को बोरिंग से निकाल दिया गया, लेकिन इसके बाद काम को आगे नहीं बढ़ाया गया।
पंप निकालकर छोड़ दिए जाने के बाद से अब तक न तो नया मोटर लगाया गया और न ही बोरिंग की मरम्मत कर पानी की आपूर्ति शुरू की गई।यही वजह है कि ग्रामीणों ने पंप हाउस पहुंचकर प्रदर्शन करते हुए जल्द पानी की आपूर्ति बहाल करने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि नल-जल योजना की देखरेख करने वाला कोई भी कर्मी नियमित रूप से गांव में नहीं पहुंच रहा है।ग्रामीणों के अनुसार टाडापर गांव में नल-जल योजना के लिए फिलहाल मात्र एक बोरिंग है।
इसी बोरिंग से गांव के सभी घरों में पानी की आपूर्ति की जाती थी। मोटर खराब होने के कारण अब पूरी आबादी पानी के लिए एकमात्र चापाकल पर निर्भर हो गई है। वहीं, पीएचईडी की जेई प्रिया कुमारी ने बताया कि पंप निकाला जा चुका है और पटना मुख्यालय को पत्र भेजा गया है। उन्होंने एक सप्ताह के भीतर योजना चालू कराने का प्रयास करने की बात कही है।
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