डीएनबी भारत डेस्क
स्थापना के बाद से ही बरौनी रिफाइनरी अपने तेल प्रतिशोधन क्षमता में लगातार वृद्धि करती जा रही है, ईधर वैश्विक तेल संकट के बीच क्षमता बढ़ाना और आवश्यक था ,यही कारण है कि समय-समय पर नए-नए उपकरण जिस प्रकार से तकनीक बढ़ती जा रही है उसी अनुसार उपकरणों में बदलाव या फिर नए उपकरणों का इंस्टॉ- लेसन बरौनी रिफाइनरी के द्वारा किया जाता रहा है,

गुजरात के कांडला बंदरगाह से 6 नए वेसल मंगवाये गए हैं जो जल मार्ग के रास्ते सिमरिया तक पहुंचे हैं यहां से अवधेश कुमार सिंह और नितेश कुमार पवन दो अभिकर्ताओं ने इसका जिम्मा आइओसीएल तक पहुंचाने का लिया है, जिसके लिए अस्थाई जैटी और स्थाई सड़क का निर्माण किया जा रहा है,चूँकि एक-एक वेसल का वजन 400 टन से भी अधिक है और तीन शीप पर 6 वेसल्स लोड है
जिसे उतार कर बरौनी रिफाइनरी पहुंचाना है,ताकि प्रतिशोधन क्षमता में और वृद्धि हो! अगले दो-तीन महीने इसे बरौनी रिफाइनरी पहुंचने में लग सकते हैं, क्योंकि इसमें कई तकनीकी दिक्कतें आएंगी, सड़क परिवहन को अवरुद्द करना पड़ सकता है, रेलवे से शटडाउन लेना पड़ सकता है,
बिजली व्यवस्था बाधित हो सकती है, यह इतनी बड़ी है कि इसे ले जाने के लिए कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, परंतु इसके आइओसीएल में पहुंचने के बाद बरौनी रिफाइनरी के तेल प्रतिशोधन क्षमता और अधिक बढ़ेगी!
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