डीएनबी भारत डेस्क
एमएसएमई विकास कार्यालय, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत एक दिवसीय प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन तेघरा प्रखंड स्थित अटल कलम भवन में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अनुमंडल पदाधिकारी तेघरा ने की।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य परंपरागत कारीगरों एवं शिल्पकारों को प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता एवं आधुनिक तकनीकों से अवगत कराना था, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने कौशल को बेहतर ढंग से विकसित कर सकें।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में अनुमंडल पदाधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना देश के पारंपरिक कारीगरों—जैसे बढ़ई, लोहार, सुनार, कुम्हार, दर्जी, नाई, मोची आदि—के लिए एक क्रांतिकारी पहल है। इस योजना के माध्यम से न केवल उन्हें कौशल उन्नयन प्रशिक्षण दिया जा रहा है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए आसान ऋण, एवं डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन भी प्रदान किया जा रहा है।
प्रशिक्षण सत्र में विशेषज्ञों द्वारा योजना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि योजना के तहत लाभार्थियों को पहले चरण में ₹1 लाख तक का ऋण और दूसरे चरण में ₹2 लाख तक का ऋण अत्यंत कम ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही, उन्हें प्रशिक्षण के दौरान प्रतिदिन भत्ता एवं आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए आर्थिक सहायता भी दी जाती है।
कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने इस योजना को ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक रूप से प्रचारित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि अधिक से अधिक पात्र लाभार्थी इसका लाभ उठा सकें। पंचायत सचिवों एवं अन्य पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में संभावित लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें योजना से जोड़ें।
इस अवसर पर सभी पंचायतों के पंचायत सचिव, विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित प्रतिभागियों से योजना का अधिकतम लाभ उठाने एवं अन्य लोगों को भी जागरूक करने की अपील की गई।
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