नालंदा का अनूठा रंग: पहले कीचड़ की मस्ती, फिर गुलाल से सजी होली

DNB Bharat Desk

नालंदा जिले में होली का उत्सव हर साल एक खास अंदाज़ में मनाया जाता है। यहां होली की शुरुआत सुबह से ही सड़कों पर कीचड़ के साथ होती है। लोग पारंपरिक रंगों से पहले कीचड़ से होली खेलकर उत्सव की अनोखी परंपरा को निभाते हैं।

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 बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इस मस्ती में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।सुबह होते ही गलियों और सड़कों पर उत्साह का माहौल बन जाता है। ढोल-नगाड़ों की थाप और होली के गीतों के बीच लोग एक-दूसरे को कीचड़ लगाकर खुशियां बांटते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है।दोपहर बाद माहौल बदल जाता है। 

नालंदा का अनूठा रंग: पहले कीचड़ की मस्ती, फिर गुलाल से सजी होली 2लोग स्नान कर नए कपड़े पहनते हैं और फिर रंग व गुलाल के साथ होली खेलते हैं। घर-घर में नाना प्रकार के पकवान बनती हैं और एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर पर्व की शुभकामनाएं दी जाती हैं।

नालंदा का अनूठा रंग: पहले कीचड़ की मस्ती, फिर गुलाल से सजी होली 3नालंदा की यह अनोखी होली न केवल जिले की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है, बल्कि आपसी भाईचारे और उत्साह का भी प्रतीक है। यहां की होली देखने दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं और इस खास परंपरा का आनंद लेते हैं।

डीएनबी भारत डेस्क

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