बछवाड़ा के लोहिया मैदान में बहा साहित्य का रस, ‘बिहारी अस्मिता’ और ‘मिथिला संस्कृति’ पर झूमे श्रोता

DNB Bharat Desk

बछवाड़ा प्रखंड स्थित ऐतिहासिक रेलवे लोहिया मैदान में रविवार की शाम होली की पूर्व संध्या पर राष्ट्रीय कवि संगम के प्रांतीय अध्यक्ष व सांसद प्रतिनिधि प्रभाकर कुमार राय के संयोजन में आयोजित होली मिलन सह अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से आये आए प्रख्यात कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा।

- Sponsored Ads-

कार्यक्रम की शुरूआत में आगत कवियों का सम्मान प्रभाकर कुमार राय ने अंगवस्त्र से किया । कार्यक्रम का आगाज अतिथियों के सम्मान और एक-दूसरे को गुलाल लगाने के साथ हुआ। यूपी से आए वीर रस के प्रख्यात कवि शिवकुमार व्यास ने जब अपनी वाणी में पन्तियां “वीर बलिदानियों की जुबानी लिखो, विकसित भारत की अनुपम कहानी लिखो। जब लिखो तब किसी पर मुरव्वत नहीं, दूध को दूध पानी को पानी लिखो।” सुन पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। वही दिल्ली से पहुंचे प्रसिद्ध हास्य कवि डॉ. रसिक गुप्ता ने मंच संचालन की कमान संभालते हुए सद्भाव का संदेश दिया उनकी कविता  ‘लाल गुलाबी नीला पीला रंग हमारे अंग चढ़े, वैर भाव को भूल सके हम, ऐसा ही कुछ भंग चढ़े.,जाति धर्म के तौर तरीके अलग-अलग अपने, लेकिन सबसे पहले दिल पर अपने, भारत मां का रंग चढ़े’ सुन युवाओं ने खूब जोश भरा।’

बछवाड़ा के लोहिया मैदान में बहा साहित्य का रस, 'बिहारी अस्मिता' और 'मिथिला संस्कृति' पर झूमे श्रोता 2वही पटना से पधारे कवि चंदन द्विवेदी ने बिहारी अस्मिता को स्वर देते हुए कहा – चौका, छक्का जारी रखिये, खुद को सब पर भारी रखिये, दिल्ली रहिये दुबई रहिये, खुद को मगर बिहारी रखिये।’ उनकी इस पंक्ति पर स्थानीय युवाओं ने जमकर उत्साहवर्धन किया। वही समस्तीपुर से पहुंचे कवयित्री शेफालिका झा ने आज के दौर के डिजिटल रील कल्चर पर कटाक्ष करते हुए पढ़ा – दो हाथों से दिल बनाती है, वायरल हो जाती है… ये लड़की इंस्टा रील बनाती है। और ‘सारा जग शरारा है, फूल जैसी लड़की है’ सोशल मीडिया और मिथिला की संस्कृति का संगम सुन लोगो ने खूब सराहा और तालियों से हौसला अफजाही किया। दरभंगा से पहुंचे कवि चंद्रमोहन पोद्दार ने अपनी कविता ‘रंग होली में ऐसा लगाएंगे हम, अंग को प्रेम के संग भिगाएंगे हम, स्वार्थ की होलिका को जला दीजिए, वृन्दावन अपने घर को बनाएंगे हम। सुनाकर मौसम को गुलाबी बना दिया। सुनाकर वृंदावन की होली का अहसास कराते हुए स्वार्थ की होलिका जलाने का आह्वान किया।

बछवाड़ा के लोहिया मैदान में बहा साहित्य का रस, 'बिहारी अस्मिता' और 'मिथिला संस्कृति' पर झूमे श्रोता 3बछवाड़ा के बाल कवि केशव प्रभाकर की कविता ‘ढूंढ रहे हैं हर कोई उसको ही,  लेकिन वो तो सबके अंदर रहता है,सारी दुनिया कान्हा कान्हा कहती है, मेरा कान्हा राधा राधा कहता है’ सुनाकर आनंद में लोगों को गोता लगाया । दर्शको ने तालियां बजाकर बाल कवि का हौसला अफजाही किया। दरभंगा से पधारे प्रतिभा स्मृति अपनी मैथली पंक्ति ‘अइबेर मिथिला मे औथिन पाहुन राम कि सब मिलि घेरब हे। पहिले सीता बहिन लगेथिन गुलाल,तखन रंग खेलब हे।’ सुनाकर लोगो को आनन्दित किया । कवि सम्मेलन में पटना से पहुंचें कवि अविनाश बंधु की कविता ‘याद करेगा  हम को ज़माना कुछ ऐसा कर जाएंगे, कुछ ग़ज़लों और कुछ गीतों में रंग नया भर जाएंगे’ सुनाकर युवाओं में जोश भर दिया ।

बछवाड़ा के लोहिया मैदान में बहा साहित्य का रस, 'बिहारी अस्मिता' और 'मिथिला संस्कृति' पर झूमे श्रोता 4कार्यक्रम में कवि विद्या ब्रह्मचारी, कवि पुरेन्दू ने अपनी गीतों से समा बांधा । कार्यक्रम की व्यवस्था में राष्ट्रीय कवि संगम के जिला अध्यक्ष बृजबिहारी मिश्रा, महामंत्री अमरेश शिशिर, सुमन चौधरी, संजीत कुमार मुन्ना, देवनीति राय, अविनाश यादव का योगदान सराहनीय रहा । कार्यक्रम में न केवल साहित्य का रसास्वादन हुआ, बल्कि विभिन्न सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को अबीर लगाकर आपसी सौहार्द की मिसाल पेश की। कवि सम्मले में विभिन्न पंचायतो से काफी संख्या में इलाके के लोगों ने कवि सम्मेलन का आनंद लिया ।

Share This Article